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कोरोना काल में नागरिक अस्पताल पर बढ़ा विश्वास, वेंटिलेटर से लेकर आरटीपीसीआर की मिली सौगात

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कोरोना महामारी के बीच लगभग 2 माह से लोगों के स्वास्थ्य और सोच पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। कोरोना से पहले प्राईवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी रहती थी लेकिन अब यह न के बराबर रह गई है। कोरोना के चलते लॉकडाउन एक और दो में कुछ प्राइवेट अस्पतालों में तो मरीजों को उपचार ही नहीं मिला, जबकि इसका दूसरा मुख्य कारण प्राईवेट अस्पतालों की फीस वृद्धि भी है जोकि कोरोना काल में बढ़ा दी गई है। दूसरी और सरकारी अस्पतालों में कोरोना काल में भी निरंतर सेवाएं देकर जनता का विश्वास जीतने का काम किया है। अलबत्ता अब मरीजों ने सरकारी अस्पताल की तरफ रुख कर लिया है। वहीं शुगर और बीपी के आने वाले मरीजों में भी कमी देखी जा रही है।
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आपरेशन की स्थिति : छावनी और शहर जिला नागरिक अस्पताल में हर माह औसतन 1 हजार आपरेशन हो रहे थे लेकिन लॉकडाउन में इनकी संख्या न के बराबर रह गई। केवल सिजेरियन आपरेशन ही हुए। वहीं दोनों नागरिक अस्पताल में पहले रोजाना 4500 ओपीडी होती थी लेकिन यह अब गिरकर 1000 रह गई है।
शुगर और बीपी के मरीजों की यह रही स्थिति: जिले में शुगर के करीब 74 हजार 148 मरीज हैं जबकि बीपी के 43 हजार 400। इनमें से लॉक डाउन से पहले सिटी सिविल अस्पताल में शुगर और बीपी के 150 मरीज रोजाना आते थे जोकि अब 50 आ रहे हैं।
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ट्रू नेट के साथ, आरटीपीसीआर और वेंटिलेटर भी आए : कोरोना के चलते जिला नागरिक अस्पतालों में न केवल ट्रू नेट मशीन आई बल्कि आरटीपीसीआर भी आ गई। इतना ही नहीं आज तक वेंटिलेटर के बिना चल रहे दोनों नागरिक अस्पतालों में 8 वेंटिलेटर भी इसी दौरान आए। अब बहुत जरूरी और मंहगे टेस्ट की जांच के लिए सैंपल पीजीआई व अन्य अस्पतालों में नहीं भेजने पड़ेंगे।
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