संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। दिल्ली कूच को लेकर चल रहे आंदोलन में किसान भाईचारे की मिसाल बन रहे हैं। आंदोलन की ताकत बनी रहे इसके लिए 13 फरवरी से साही पकवानों का लंगर सुबह से शाम चल रहा है। पंजाब के अलग-अलग शहरों से आए किसान वैज बिरयानी तो कोई खीर, दुध, रोटी व सब्जी तैयार रह रहा है तो कोई पुलाव।
बाकायदा कुछ ट्रालियों में चलती-फिरती रसोई बनी हुई है तो कुछ में कच्ची सब्जियां व राशन है। केवल बॉर्डर पर पुलिस से टकराव करने वाले ही नहीं बल्कि सभी किसान आंदोलन में अपने अलग-अलग ड्यूटी के जरिए अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा सुबह से लेकर शाम तक चाय बिस्किट आदि की व्यवस्था है। किसानों का कहना है कि आंदोलन चाहे एक दिन चले या पूरा साल। उनकी तरफ से किसी भी किसान को दुकान से खाना खरीदकर खाने नहीं दिया जाएगा। बल्कि तीनों समय लंगर चलेंगे। बाबे ने मेहर रखी तो जल्द ही मांग पूर होगी या फिर वह दिल्ली कूच कर लेंगे।
महिलाएं परिवार संभाल रही तो किसान आंदोलन में
आंदोलन में जहां पुरुष शंभू बॉर्डर पर मोर्चा संभाले हुए है वहीं सुबह से लेकर रात तक लंगर चलाने के लिए चुल्हा-चोखा संभाला हुआ है। अमृतसर के गांव ककड़ से आए किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के किसान सतवंत ने बताया कि उनके गांव से कई ट्रालियां है और उनकी तरफ से लंगर लगाया जा रहा है। आंदोलन जब तक चलेगा वो लंगर की व्यवस्था करेंगे। इसके अलावा बठिंडा निवासी गोरा सिंह ने बताया कि उनके साथ करीब 100 ट्रैक्टर-ट्रालियां है और उनमें सभी का खाना वह खुद बना रहे हैं और दूसरे किसानों के लिए भी सुबह से शाम तक भोजन की व्यवस्था की जा रही है।