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वेल्यू आफ मनी : इंजीनियरिंग के छात्रों ने स्पेशल टास्क में कमाए रुपये

Thu, 09 Mar 2017 12:43 AM IST
ब्यूरो/अंशुल शर्मा अंबाला
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पॉकेट मनी को चंद मिनटों में उड़ाना काफी आसान है, लेकिन यदि इसे कमाना पड़े तो पसीने छूट जाते हैं। कुछ ऐसा ही अहसास इंजीनियरिंग के छात्रों को भी कराया गया, जब उनके संस्थान के एक प्रोफेसर ने विद्यार्थियों को कुछ नकद राशि देकर मार्केट में भेजा और कहा कि इस नकदी को कम से कम चार गुना करके लाना है। लेकिन शर्त यह भी है कि श्रमदान करना है और जहां पर काम किया जाए, उसका कांटेक्ट नंबर भी लाना है। इतना ही नहीं इन विद्यार्थियों से एटीएम, मोबाइल आदि सब कुछ प्रोफेसर द्वारा अपने पास ही रखवा लिया गया।
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इस तरह से किया विद्यार्थियों ने टास्क पूरा
अंबाला कालेज आफ इंजीनियरिंग एंड अप्लाइड रिसर्च के विद्यार्थियों को एक प्रोफेसर ने विद्यार्थियों को जीवन में रुपयों की कीमत के बारे में बताया। थ्योरी के तौर पर तो प्रोफेसर ने विद्यार्थियों को सारी बात समझा दी, लेकिन बात प्रैक्टिकल की आई, तो विद्यार्थी भी हैरान रह गए। प्रोफेसर ने इन विद्यार्थियों को सीधे कहा कि वे बीस रुपये लेकर मार्केट में जाएं और इसी रकम को चार गुणा तक कमाकर लाएं।

विद्यार्थियों को भी यह टास्क नया और चैलेंजिंग लगा। साथ ही यह शर्त भी लगा दी गई कि विद्यार्थी श्रमदान करके कमाना है और अपने साथ मोबाइल, एटीएम आदि लेकर नहीं जाना है। यह टास्क मिलने के बाद विद्यार्थी मार्केट में चले गए और अपने-अपने तरीके से श्रमदान कहां करें, ढूंढने लगे। इन विद्यार्थियों ने सिविल अस्पताल अंबाला कैंट में सफाई की, अस्पताल में आए सामान को अनलोड कराया, घरों में जाकर व्हीकल वाशिंग की, मार्केट से सामान खरीदकर डोर टू डोर बेचा। इन सभी ने जहां पर भी श्रमदान किया, उनका कांटेक्ट नंबर भी लिया और कमाई करने के बाद प्रोफेसर को यह नंबर दे दिए।
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चैरिटी में दिए रुपये
जिन विद्यार्थियों ने श्रमदान करके यह रुपये कमाए, उनमें से अधिकतर छात्रों ने चैरिटी में यह राशि दे दी, जबकि कुछ ने यह राशि अपने परिजनों को दे दी। परिजनों ने भी अपने बच्चों की पहली कमाई देखकर खुशी से फूले नहीं समाये। इन विद्यार्थियों ने भी कहा कमाई का यह पहला अनुभव रहा और इसका सकारात्मक प्रभाव भी मिला।  

सकारात्मक संघर्ष से मिलता है लक्ष्य
कालेज के विद्यार्थियों में ध्रुव, साहिल, श्वेता, दिव्या, गौरव, ऋषभ ने बताया कि कालेज लाइफ अभी तक शिक्षा ही ग्रहण कर रहे थे, लेकिन श्रमदान कर कमाई करने का यह पहला अनुभव रहा है। इससे पता चला है कि जीवन में संघर्ष यदि सकारात्मक हो तो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। लेकिन यदि कमाई के लिए नकारात्मक रास्ते पर चलें, तो इसका दुष्प्रभाव उनके साथ-साथ समाज पर भी पड़ता है।

श्रमदान की वैल्यू समझाई
प्रोफेसर रोहित आहुजा ने बताया कि वह केमिस्ट्री के टीचर हैं और विद्यार्थियों को इसी तरह से टास्क देकर उनको जीवन में श्रमदान, कमाई और रुपयों की वैल्यू समझाई जाती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को यदि एक सही और सकारात्मक दिशा दे दी जाए, तो इसका जीवन भर असर रहता है। एक तरह से यह जीवनयापन के लिए संघर्ष की प्रेरणा भी देता है।
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