डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत को अंबाला सेंट्रल जेल से वीआईपी ट्रीटमेंट के साथ रिहा कर दिया गया। पंचकूला हिंसा के मामले में पुलिस हनीप्रीत के खिलाफ देशद्रोह के आरोपों को साबित नहीं कर पाई थी। इसी वजह से अदालत ने उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए थे। शाम को ईमेल के जरिए सेंट्रल जेल पहुंचे आदेशों के बाद ही हनीप्रीत को रिहा कर दिया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस उसे परिवार के साथ अंबाला की सीमा तक ले गई।
वीआईपी नंबर की गाड़ी में सवार होकर निकली
अंबाला सेंट्रल जेल में हनीप्रीत दो साल तीन महीने से बंद थी। बुधवार को पंचकूला हिंसा मामले में जमानत मिलते ही उसकी रिहाई तय हो गई थी। इसी वजह से शाम को अंबाला सेंट्रल जेल के बाहर पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। जेल परिसर के अंदर आने जाने वालों पर रोक लगा दी गई। मीडिया को जेल परिसर में दाखिल नहीं दिया गया। भाई साहिल तनेजा खुद परिवार के साथ हनीप्रीत को लेने सेंट्रल जेल पहुंचे थे। रिहाई के दौरान भी हनीप्रीत को वीवीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। रिहाई से पहले जेल परिसर में पंजाब नंबर (पीबी 10 ईडी 0041) की फार्चूनर गाड़ी ने प्रवेश किया। इसके बाद यह गाड़ी सीधे सेंट्रल जेल के मुख्य प्रवेश द्वार के भीतर दाखिल हुई। तब हनीप्रीत इसमें सवार होकर जेल से निकलीं। इसके साथ ही इस गाड़ी को पुलिस की तीन गाड़ियों ने एक्सकोर्ट दिया। रिहाई के समय कार में बैठी हुई हनीप्रीत ने पीले रंग का सूट पहना था। सेंट्रल जेल से निकलते ही फार्चूनर ने तेज रफ्तार पकड़ ली।
इस वजह से मिली जमानत
साध्वी यौन शोषण के मामले में 25 अगस्त 2017 को डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम को कारावास की सजा होने के बाद पंचकूला में हिंसा भड़क गई थी। तब पुलिस ने इसके लिए हनीप्रीत समेत कई लोगों को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ भादंसं की धारा 121 व 121 ए के साथ 145,150,151,152,153,216 व 120 बी के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि मामले की जांच के दौरान पुलिस हनीप्रीत के खिलाफ देशद्रोह (धारा 121 व 121 ए) के आरोपों को साबित नहीं कर पाई। बचाव पक्ष के कड़े ऐतराज के बाद अदालत ने इस आरोप को खारिज कर दिया। दूसरी धाराओं के तहत ही हनीप्रीत के खिलाफ आरोज तय किए गए। केस कमजोर होने के कारण ही बचाव पक्ष ने अदालत से हनीप्रीत को जमानत पर रिहा करने का आग्रह किया था। तब अदालत ने उसकी रिहाई के आदेश जारी कर दिए।