बिजली निगम द्वारा लो वोल्टेज व बार-बार बिजली कट का खामियाजा छावनी नागरिक अस्पताल को भुगतना पड़ा। अस्पताल के सभी मुख्य कंप्यूटर को चलाने वाला यूपीएस ही फुंक गया। नौबत यह आ गई कि अस्पताल का सारा कंप्यूटर पर होने वाला काम मैनुअल हो गया। ऐसे में न केवल स्टाफ को मैनुअल एंट्री करने के लिए डबल परेशानी झेलनी पड़ी, वहीं मरीजों को अपना उपचार करवाने के लिए घंटों भटकना पड़ा। इमरजेंसी सहित ओपीडी के रजिस्ट्रेेशन काउंटर पर आने वाले सैकड़ों मरीजों को उपचार से पहले जहां स्टाफ को मैनुअल ही कार्ड और फिर अपने रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ रही थी। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो अस्पताल के यूपीएस बैटरियों को बदलने के लिए पहले मुख्यालय में पत्र भेजा गया था। बिजली के झटकों से जब यूूपीएस ने भी काम करना बंद कर दिया तो आनन-फानन में इंजीनियर को बुलाया। चेकिंग के बाद पता चला कि यूपीएस तभी काम करेगा जब बैटरियां पूरी तरह से बदली जाएंगी। रिमाइंडर के तौर पर शुक्रवार को दोबारा मुख्यालय पत्र भेजकर बैटरियों को दुरुस्त करवाने की गुहार लगाई गई है।
आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए घंटों करना पड़ा मरीजों को इंतजार
डॉक्टर अस्पताल में दूसरे टेस्ट करवाने के लिए आने वाले मरीजों को साथ के साथ मैनुअल एंट्री करते रहे। इस बीच कोविड-19 का टेस्ट करवाने वालों को बेहद परेशानी उठानी पड़ी। इस टेस्ट के लिए कंप्यूटर से पांच तरह की स्लिप मिलती हैं और उसे अलग-अलग रिकॉर्ड में लगाना पड़ता है। ऐसे में बड़ा मुश्किल था कि एक मरीज की पांचों पर्ची पर मैनुअल एंट्री करना। अस्पताल प्रबंधन ने इस अव्यवस्था व देरी होने पर मरीजों के रोष को देखते हुए छह स्टाफ सदस्यों का अलग से ग्रुप बना दिया। जिन्होंने मैनुअल स्लिप बनाकर 20-20 के ग्रुप में लोगों के टेस्ट किए।
बेटी के कोविड टेस्ट से इनकार कर लौटाया
परिवार के साथ सुबह 10 बजे ही अस्पताल पहुंच गया था। यहां आकर पता चला कि कंप्यूटर बंद होने के कारण आरटीपीसीआर टेस्ट की पर्चियां ही नहीं कट रही हैं। इमरजेंसी वार्ड के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुंचे तो वहां भी पर्ची नहीं कटी। आखिर में निराश होकर घर लौटना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन को कंप्यूटर चलाने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
गोविंद, बीसी बाजार
लंबे समय से लो वोल्टेज व बार-बार बिजली कट की समस्या आ रही है। पहले ही अस्पताल के कंप्यूटरों की बैटरी बैकअप न देने के कारण मुख्यालय में रिप्लेसमेंट की डिमांड भेजी गई है। बिजली के बार-बार कट के कारण अब बैटरियों के यूपीएस में भी फाल्ट आ गया। जब तक बैटरियां रिप्लेसमेंट नहीं हो जाती तब तक अस्पताल में मैनुअल ही मरीजों की एंट्री होगी।
डॉ. विनय गोयल, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेेंडेंट नागरिक अस्पताल