अंबाला। हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होती हुई टांगरी नदी अंबाला में करीब 16 किलोमीटर का सफर तय करती है। यह नदी कभी 100 मीटर से भी अधिक चौड़ी हुआ करती थी, मगर अब सिकुड़कर 60 मीटर भी इसकी चौड़ाई नहीं रह गई है। इसकी तलहटी में जमीनों को बेचने का काम यूं तो 40 साल पहले शुरू हुआ था मगर बीते 10 वर्षों में कॉलोनियां काट-काट कर क्षेत्र की जमीनों को धड़ल्ले से सस्ते दामों पर बेचा गया। किसी ने यह तक परवाह नहीं की कि नदी की जगह में मकान बनाना कितना महंगा पड़ सकता है। शायद यही कारण है कि अनियोजित निर्माण से सिकुड़ी टांगरी नदी एक बार फिर क्षेत्रवासियों के लिए आपदा का सबब बनी है।
जानकार बताते हैं कि पहले टांगरी नदी पंजाब के जिला मोहाली के गांव झूठों का नगला से होती हुई अंबाला की सीमा में गांव सरसेहड़ी में दाखिल होती थी। इसके बाद कई गांवों को पार करते हुए यह अंबाला छावनी में मौजूदा समय में बने इंडस्ट्रियल एरिया से होकर गुजरती थी। इसके आसपास किसानों की जमीन थी। वहीं यहां पर कुछ शामलात की भूमि थी, मगर कुछ वर्षों में पर्यावरणीय परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप इतना बढ़ा कि टांगरी का स्वरूप ही बदल गया। लगभग 30 साल पहले टांगरी इंडस्ट्रियल एरिया को छोड़कर किसानों की जमीन से होकर बहने लगी।
नदी पर प्रवासी राज्यों से अंबाला में आए लोगों ने अधिकतर प्लॉट खरीदे और अपने मकान बनाए, क्योंकि पूरे अंबाला में सबसे सस्ते प्लॉट यहीं पर थे। देखते ही देखते 10 वर्षों में यहां एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों बस गईं और 400 से अधिक घरों का निर्माण हो गया। क्षेत्र में जैसे-जैसे आबादी का विस्तार होता गया नदी की चौड़ाई कम होती गई।
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राजस्व रिकॉर्ड में अभी यह सरकारी जमीन नहीं, पहले बाढ़ के बाद भी नहीं ली सुध
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड अनुसार, टांगरी नदी अभी किसानों और शामलात की जमीन से होकर ही बह रही है। नियमानुसार जब यह नदी पहले भी बाढ़ की स्थिति पैदा कर चुकी है तो सरकार को इस नदी के आसपास की जमीन अधिगृहीत कर सिर्फ खेती के लिए छोड़नी चाहिए थी, मगर ऐसा नहीं हुआ जिन किसानों की जमीन नदी के पास थी उन्होंने जमीन को आगे बेच दिया, जिन्होंने जमीन खरीदी उन्होंने बाकायदा रजिस्टरी भी कराई, मगर बीते कुछ वर्षों में भूमाफिया यहां सक्रिय हो गए और शामलात की जमीन पर भी प्लॉट काटकर लोगों को सस्ते दामों पर बेचने लगे। इसका नतीजा यह है कि आज टांगरी क्षेत्र में बने कई मकान मालिकों के पास अपनी जमीन की रजिस्टरी तक नहीं है।
विभाग ने दे दिए बिजली-पानी के कनेक्शन
जिन लोगों के पास घर की रजिस्टरी थी, उन्हें तो नियमानुसार बिजली-पानी के कनेक्शन मिलने चाहिए थे, मगर जिन्होंने अवैध रूप से शामलात की जमीन पर कब्जा कर घर बनाए, उन्हें भी विभाग ने बिजली-पानी के कनेक्शन मुहैया करा दिए। जब बिजली-पानी के सभी को कनेक्शन मिल गए तो प्रॉपर्टी डीलरों को सहारा मिल गया और उन्होंने प्लॉटों को अप्रॅूव्ड कहते हुए प्रवासियों काे बेच दिया। यह नहीं बल्कि अब तो इन घरों की नगर परिषद बाकायदा प्रॉपर्टी आईडी भी बना चुकी है।
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बीते कई वर्षों से बाढ़ की मार झेल रहा यह क्षेत्र
टांगरी नदी में ऐसा पहली बार नहीं है, जब पानी अधिक आया है। यहां हर बार पहाड़ों से अत्यधिक पानी आता है, मगर वर्ष 2001 में इतना पानी आया कि छावनी क्षेत्र में बाढ़ आ गई। इसके बाद वर्ष 2010 में भी ऐसे ही हालात बने। सरकार को करोड़ों रुपये की राहत सामग्री वितरित करनी पड़ी थी। इसके बावजूद शासन-प्रशासन टांगरी को लेकर अलर्ट नहीं हुआ। अब एक बार फिर 13 साल बाद वर्ष 2023 में टांगरी नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। इस बार यहां पहले की अपेक्षा अधिक रिहायश होने के कारण नुकसान ज्यादा हुआ है।