फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनफिट चालक चलाते हैं बसें, फर्स्ट एड बाक्स में दवाइयां भी एक्सपायर

Thu, 31 Mar 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, अंबाला
विज्ञापन
अनफिट चालक चलाते हैं बसें, फर्स्ट एड बाक्स में दवाइयां भी एक्सपायर - फोटो : Amar ujala
विज्ञापन
हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे प्रदेश भर में प्राइवेट स्कूलों द्वारा छात्रों को ढोने के लिए इस्तेमाल की जाने वाहनों की चैकिंग करवाई जा रही है। इसी कड़ी में बुधवार को अंबाला सिटी के प्राइवेट स्कूलों में वाहनों की चेकिंग की गई। इस काम के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर स्पेशल टीम गठित की गई है।
विज्ञापन

इस टीम ने सिटी के कई प्रावइेट स्कूलों को खंगाला और वहां स्कूलों की प्राइवेट बसों को पूरी तरह से खंगाला। इस दौरान टीम ने बसों को भीतर से लेकर बाहर तक उन्हे तय मानकों के तहत चैक किया, वहीं वाहन चालकों की फिटनेस से लेकर उनके वाहन संबंधी कागजातों को भी खंगाला।  लेकिन टीम के सदस्य उस वक्त हैरान हो गए, जब उनके सामने ये तथ्य आए कि प्राइवेट स्कूलों में जिन वाहनों का इस्तेमाल छात्रों को ढोने के लिए किया जाता है, उनमें से अधिकतर वाहन तो नियमों पर खरे ही नहीं उतरते। टीम ने इस दौरान स्कूल संचालकों व चालकों को चेतावनी दी, वहीं ये टीम जल्द ही अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करेगी। इस टीम में हरियाणा राज्य बाल सरंक्षण आयोग के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी धर्मवीर कादियान, जिला बाल संरक्षण अधिकारी मेघा सिंगला, एमवीआई महावीर, समेत ट्रैफिक पुलिस के अफसर मौजूद रहे।  इस दौरान करीबन चालीस बसों को चैक किया गया।
 इन खामियों को देखकर हैरान हुई टीम
 - प्राइवेट स्कूलों में जिन बसों का इस्तेमाल छात्रों को ढोने के  लिए किया जा रहा है, उन्हें चलाने वाले चालक अनफिट है, उनके  पास अपना फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है
विज्ञापन

- बसों में जो फ्सर्ट एड बाक्स मिले, उनमें पड़ी तमाम दवाइयां एक्सपायर हो चुकी है, हादसे के दौरान यही फस्र्ट एड बाक्स बहुत काम आता है।
- बसों पर न तो चाइल्ड लाइन नंबर अंकित था और न ही
-बसों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट भी मौजूद नहीं थी।
-अधिकतर बसों में अग्निशमक यंत्र गायब थे, कुछ में थे तो एक्सपायर
-छात्राओं के लिए बसों में जरूरी महिला अटेंडेंट भी नियुक्त नहीं थी
-बसों में नियमानुसार जरूरी सीसीटीवी कैमरे भी नहीं थे
- छोटी बसों में आपतकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए इमरजेंसी डोर भी नहीं थे
- जिन बसों में कैमरे मिले, उनमें पचास दिन की रिकार्डिंग होनी चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं मिला
- कई बसें तो बहुत ज्यादा कंडम हालत में थी
---
हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे प्रदेशभर के प्राइवेट स्कूलों में इस तरह की चैकिंग की जा रही है। स्कूलों में उन वाहनों की चैकिंग करनी है, जो स्कूली छात्रों को ढोते हैं, लेकिन हैरानी ये देखकर होती है कि स्कूल संचालकों के ये वाहन कायदों पर बिल्कुल भी खरे नहीं उतरते, स्कूल छात्रों को ढोते वक्त उनके जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करते हैं। ये रिपोर्ट जल्द ही टीम हाईकोर्ट में पेश करेगी।
विज्ञापन

-परमजीत सिंह बड़ौला, सदस्य, हरियाणा राज्य बाल संरक्षण आयोग-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें