- 15 साल पुरानी बसों को रंग-रोगन कर नया बनाने का प्रयास, फिटनेस न सुरक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सड़कों पर दौड़ती खटारा स्कूली बसें और बिना फिटनेस के फर्राटा भरते निजी वाहन बच्चों की जान को जोखिम में डाल रहे हैं। हालत यह हैं कि 15 साल की मियाद पूरी कर चुके वाहन अब स्कूलों के लिए सुविधा बने हुए हैं, जिन्हें रंग-रोगन करके आरटीए विभाग की आंखों में धूल-झोंकी जा रही है।
छावनी के कई नामी और निजी स्कूलों में लगी बसों की जमीनी हकीकत कुछ और है। पड़ताल में सामने आया कि कई बसों की बॉडी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। पीला रंग भी पपड़ियां बनने लगी हैं। वहीं बसों के टायर इस कदर घिस चुके हैं कि बारिश के दिनों में इनके फिसलने का खतरा है। पुरानी तकनीक वाली इन बसों के ब्रेक सिस्टम में अक्सर शिकायत रहती है। कई बसों की फर्श में छेद हैं और खिड़कियां आधी-अधूरी बंद होती है। कुछ बसों में खिड़कियां तो हैं लेकिन लोहे के पाइप नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में बस के अंदर बैठे बच्चे चोटिल हो सकते हैं।
बिना फिटनेस फिट दिख रहे वाहन
नियमों के मुताबिक 15 साल पुराने व्यावसायिक वाहनों का सड़क पर चलना प्रतिबंधित है लेकिन जिले में ऐसी दर्जनों बसें चल रही हैं। आरटीओ के आंकड़ों और सड़कों की स्थिति में बड़ा अंतर है। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ये वाहन न केवल प्रदूषण फैला रहे हैं बल्कि तकनीकी रूप से भी अनफिट हैं।
निजी वैन और ऑटो बने खतरा
सिर्फ बसें ही नहीं, निजी तौर पर लगे वैन और ऑटो की स्थिति और भी बदतर है। इन वाहनों के टायर कंडम हो चुके हैं। वहीं इन वाहनों को मॉडिफाई किया गया है। पुरानी सीटों को हटाकर इनकी जगह दूसरी सीटें लगाई गई हैं ताकि अधिक से अधिक बच्चे इन वाहनों में बैठ सकें।
स्कूली वाहनों की फिटनेस के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि 15 साल पुरानी बसों पर कार्रवाई की जा सके। बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं होगा।
- सुशील कुमार, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, अंबाला
अंबाला छावनी में बिना स्कूल नाम के सड़क पर खड़ी बस। संवाद
अंबाला छावनी में बिना स्कूल नाम के सड़क पर खड़ी बस। संवाद
अंबाला छावनी में बिना स्कूल नाम के सड़क पर खड़ी बस। संवाद