अंबाला। छावनी की सेंट्रल लाइब्रेरी में सोमवार को अमर उजाला के ट्रैफिक लाइटों के इंतजार अभियान के लिए संवाद आयोजित हुआ। इसमें युवाओं और समाजसेवियों ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि शहरों के मुख्य चौक चौराहे हादसों का कारण बनते हैं।
ये चौराहे वे हैं जिन्हें सालों बाद भी ट्रैफिक लाइटों का इंतजार है। जबकि संबंधित अधिकारी लगातार इसे अनदेखा करते आ रहे हैं। अगर पुलिस सभी मुख्य चौक पर ट्रैफिक लाइटों व कैमरे लगा दे तो इन हादसों का लगाम लग जाएगी। यह चौराहे पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएंगे।
व्यस्त चौराहों पर लगता है डर : अमर उजाला अभियान की सराहा करते हुए समाजसेवी सुभाष चंद, अमन कालड़ा, संत राम, देवेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, विशाल और राजमल ने कहा कि सिटी के कालका चौक, साहा चौक और अंबाला छावनी में टांगरी बांध वाले चौराहे और जंडली पुल के पास अंबाला-दिल्ली हाईवे पर फ्लाईओवर के नीचे व बस स्टैंड फ्लाईओवर के पास लाइटें न होने के कारण यहां से गुजरते समय हादसे का डर रहता है। साथ ही जाम की स्थिति से भी जूझना पड़ता है।
लंबे समय से समाजसेवी इस मांग को उठा रहे हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कपिल का कहना है कि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपनी मंजिल पर जल्दी पहुंचना चाहता है। यही कारण होता है कि व्यस्त चौराहों से लोग तेजी से निकलते हैं। ट्रैफिक लाइटें हो तो चालक एक बार अलर्ट हो जाता है। रफ्तार धीमी कर चौराहे से गुजरता है। इसलिए ट्रैफिक लाइटों की बहुत जरूरत है।
कपिल
कपिल
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