अंबाला में मध्यप्रदेश में टांटीपुर नाम फर्जी तहसील दिखाकर बनवाई गई फर्जी जनरल पॉवर ऑफ अटार्नी (जीपीए) के आधार पर अंबाला में प्लाटों को रजिस्टरी करने के मामले में फंसे नायब तहसीलदार और तहसीलदार फर्जी दस्तावेजों से की गई हर रजिस्टरी पर 2 प्रतिशत हिस्सा बतौर रिश्वत लेते थे।
जिस प्लाट की रजिस्टरी तहसील से करवाई जाती थी, उस प्लाट की कुल कीमत का 2 प्रतिशत तहसीलदारों को देना पड़ता था। यह खुलासा इसी मामले में पकड़े गए प्रापर्टी डीलराें ने पूछताछ में किया है।
उनके इसी खुलासे के बाद विजिलेंस ने नौ नायब तहसीलदार और तहसीलदारों के खिलाफ सुबूत जुटाए हैं और उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया है। यही सुबूत शनिवार को विजिलेंस की ओर से अदालत के समक्ष पेश किए गए।
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार प्रापर्टी डीलर, कालोनाइजर व दलाल मध्यप्रदेश के टांटीपुर इलाके में स्थित फर्जी तहसील से प्लाटों की फर्जी जनरल पॉवर ऑफ अर्टानी (जीपीए) बनवा लेते थे। उसके बाद यहां इसी फर्जी जीपीए के आधार पर यहां तहसीलों में विभिन्न नायब तहसीलों व तहसीलदारों से रजिस्टरी करवा लेते थे, लेकिन प्रापर्टी डीलरों, कालोनाइजरों व दलालों को रजिस्टरी करवाने की एवज में नायब तहसीलदारों व तहसीलदारों को प्लाट की कुल लागत का 2 प्रतिशत हिस्सा बतौर रिश्वत देना पड़ता था। उसे बाद ही रजिस्टरी होती थी।
रिश्वत की यह राशि किसी चैक या बैंक के माध्यम से नहीं, बल्कि कैश देने पड़ते थे। विजिलेंस ने प्रापर्टी डीलरों के तमाम बयानों को नायब तहसीलदारों व तहसीलदारों के खिलाफ ठोस सुबूत बनाया है और उसे अदालत में पेश कर दिया है।
यह है मामला
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के टांटीपुर इलाके में एक फर्जी तहसील से जमीनों की फर्जी जीपीए बनवाकर प्रापर्टी डीलरों व कालोनाइजरों ने लोगों को प्लाट बेच दिए और तहसील से उसकी पक्की रजिस्ट्रियां करवा दी। इस दौरान खूब चांदी कूटी गई।
शिकायत होने पर विजिलेंस ने जांच की तो ऐसी 271 रजिस्ट्रियां पकड़ में आ गईं, जिसके आधार पर विजिलेंस ने प्रॉपर्टी डीलरों पर शिकंजा कसना शुरू किया और पांच प्रॉपर्टी डीलर काबू कर लिए, लेकिन इसी मामले में अब नौ तहसीलदारों को भी विजिलेंस ने आरोपी बनाया है और इसकी स्पेशल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।