अंबाला रेलवे ट्रैक पर मंगलवार सुबह रविदास माजरी निवासी रामकुमार के पैर में बेड़ी लगा शव मिलने के बाद परिजनों ने जमकर बवाल किया।
परिजनों ने पुलिस पर अवैध हिरासत में रखने और हत्या कर शव ट्रैक पर फेंकने का आरोप लगाते हुए चौकी नंबर दो का घेराव किया और पांच घंटे तक रेलवे रोड को जाम कर दिया।
उधर, डीसीपी विनोद कौशिक के आदेश के बाद तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ पर हत्या, अवैध हिरासत में रखने, सुबूत मिटाने और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
मौके पर पहुंचे डीसी केएम पांडुरंग और मेयर रमेश मल ने भी लोगों को समझाते हुए पांच घंटे बाद जाम खुलवाते हुए हंगामा कर रहे लोगों को शांत करवाया।
जीआरपी को ट्रैक पर मिला शव
मंगलवार सुबह जीआरपी को किसी व्यक्ति ने सूचना दी कि एक व्यक्ति का शव शहर रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर कटा पड़ा है।
जीआरपी इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र व जीआरपी डीएसपी राजकुमार वालिाय मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि युवक का सिर धड़ से अलग था और उसके पैर में बेड़ियां बंधी हुई थी।
जीआरपी को तभी शक हो गया था कि मरने वाला कोई हवालाती, बंदी या कैदी है, जो या तो फरार होने के बाद भागते हुए यहां कटकर मर गया, या फिर पुलिस किसी ट्रेन में मध्यरात्रि इसे ले जा रही होगी, तो शायद चलती ट्रेन से गिरकर इसकी मौत हुई है।
इसकी सूचना जीआरपी ने अंबाला समेत हरियाणा के सभी जिलों, पंजाब पुलिस और सहारनपुर पुलिस को भिजवा दी थी। लेकिन दोपहर तक युवक की शिनाख्त नहीं हुई।
मगर दोपहर को पुलिस चौकी नंबर दो ने मृतक की शिनाख्त करते हुए बताया कि मृतक रामकुमार को नया बाग क्षेत्र के कुछ लोगों ने नशे की हालत में चोरी के आरोप में पकड़ा था और चौकी लेकर आए थे। पुलिस ने युवकों को रात को बेड़ियां बांधकर कमरे में बैठा दिया। लेकिन सुबह युवक का शव ट्रैक पर मिला।
पुलिस बोली, आधी रात को चौकी से भाग गया था
पुलिस चौकी नंबर दो के प्रभारी सतबीर हुड्डा व हेड कांस्टेबल प्रकाश ने बताया कि दोनों युवक रात को नशे की हालत में थे और उन पर चोरी का आरोप था।
चोरी करते हुए पकड़ने के बाद कुछ लोग उसे चौकी में लेकर आए थे। आरोपी के पैर में बेड़ी बांध कमरे में बिठा दिया गया था। पुलिस के मुताबिक आधी रात को आरोपी चौकी से फरार हो गए और इसकी जानकारी पुलिस को सुबह लगी।
परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
चौकी पर हंगामा कर रहे परिजनों का कहना है कि वे सोमवार रात को ही पुलिस चौकी में अपने बच्चों को छुड़वाने पहुंचे थे, मगर पुलिस ने उन्हें सुबह आकर बात करने को कहा।
उसके बाद मंगलवार सुबह वे जब दोबारा चौकी पहुंचे, तो वहां उनके बच्चे गायब थे। परिजनों के अनुसार पुलिस ने पहले तो उन्हें कोई जानकारी ही नहीं दी। बाद में पता चला कि रामकुमार का शव मिल गया है।
इसी बात को लेकर परिजनों दोपहर से लेकर शाम तक पांच घंटे चौकी में जमकर हंगामा किया और चौकी का घेराव करते हुए रेलवे रोड भी जाम कर दिया। इस वजह से शहरवासियों को खासी परेशानी हुई।
मेयर भी बैठे धरने पर, डीसीपी ने दर्ज करवाया केस
हंगामा कर रहे लोग पुलिस कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज और उन्हें गिरफ्तार करने की जिद में अड़े रहे। मेयर रमेश लाल मल ने भी लोगों को समर्थन दिया और उनके साथ धरने पर बैठ गए। पुलिस पर लगातार दबाव बढ़ता गया और लोग भड़कते गए।
इसके बाद डीसीपी विनोद कौशिक ने पुलिस चौकी नंबर दो के प्रभारी सतबीर हुड्डा, ईएएसआई दलबीर और हेड कांस्टेबल प्रकाश के खिलाफ हत्या करने, अवैध हिरासत में रखना और सुबूत मिटाने के आरोप में केस दर्ज करवा दिया है।
डीसीपी ने तीनों पुलिस वालों को तुरंत गिरफ्तार भी करवा दिया और हंगामा कर रहे लोगों को इस बात जानकारी दी। लेकिन उसके बाद लोग डीसी को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़ गए।
शाम को करीबन छह बजे डीसी केएम पांडुरंग भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने लोगों न्याय का भरोसा दिया। इसके बाद प्रदर्शन कर रहे लोग शांत हुए।
घटना पर जमकर चली राजनीति
इस पूरे वबाल को कैश करने के लिए कांग्रेस और इनेलो ने कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेसी मेयर रमेश मल और पार्षद बिट्टू चावला जहां मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने में जुटे रहे, वहीं इसकी सूचना मिलते ही इनेलो नेता भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने भी लोगों को समर्थन देते हुए उनके साथ हंगामे में शामिल हो गए।