अंबाला। भारतीय रेलवे के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रही नेताजी एक्सप्रेस का संचालन अब नए एलएचबी (लिंक-हॉफमैन-बुश) कोच से किया जाएगा। इस ट्रेन की यादें स्वतंत्रता आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी हैं। इसलिए विशेष ट्रेन की श्रेणी में आने वाली यह ट्रेन अपनी ऐतिहासिक यात्रा के लिए भी जानी जाती है।
मौजूदा समय में इस ट्रेन में आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) चेन्नई में निर्मित लोहे के कोच लगे हुए हैं। इनकी हालत अब काफी खस्ता हो गई है। ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की ओर से रोजाना सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी शिकायत की जा रही है। इन सभी शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए पूर्व रेलवे (ईआर) ने नए एलएचबी कोच लगाने का फैसला किया है।
इंजन सहित लगे हैं 25 कोच
नेताजी एक्सप्रेस में इंजन सहित 25 कोच लगे हुए हैं। ट्रेन लगभग 32 घंटे में 1714 किमी का सफर तय करती है। इस ट्रेन की अधिकतम गति 80 किमी प्रतिघंटा है। जबकि नए एलएचबी कोच आधुनिक डिजाइन के साथ बनाए गए हैं जोकि रेल दुर्घटना में एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते । यह कोच स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं जोकि वजन में हल्के और रखरखाव के लिए आसान हैं। एलएचबी कोच की औसत गति 160 किमी प्रति घंटा और शीर्ष गति 200 किमी प्रति घंटा है।
वर्ष 1866 में भाप इंजन से हुई थी शुरुआत
-नेताजी एक्सप्रेस को पहले कालका मेल के नाम से जाना जाता था।
-भारत की सबसे पुरानी यह ट्रेन वर्ष 1866 में हावड़ा (कोलकाता) और दिल्ली के बीच ईस्ट इंडिया रेलवे मेल के रूप में शुरू हुई थी जोकि भाप इंजन से चलती थी।
-1891 में इस ट्रेन को दिल्ली से कालका तक विस्तारित किया गया और इसे कालका मेल के नाम से जाना जाने लगा।
-17 जनवरी 1941 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस गोमो से इस ट्रेन में सवार हुए थे, जब वे ब्रिटिश राज से बचने के लिए पेशावर जा रहे थे।
- 23 जनवरी 2021 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती के उपलक्ष्य में इस ट्रेन का नाम बदलकर नेताजी एक्सप्रेस कर दिया गया। यह ट्रेन हावड़ा और कालका के बीच रोजाना चलती है।
वर्जन
नेताजी एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन पूर्व रेलवे द्वारा किया जाता है। उन्होंने ट्रेन में नए कोच लगाने का फैसला किया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस ट्रेन में नए कोच लग जाएंगे। नए एलएचबी कोच लगने से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।
विनोद भाटिया, डीआरएम, अंबाला।