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Ambala News: स्थाई प्राचार्य नहीं, वरिष्ठों को कमान

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अंबाला सिटी। प्रदेश में कई राजकीय और निजी कॉलेज में स्थाई प्राचार्य तैनात नहीं है। इस वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई खराब होने के साथ ही काॅलेज के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और दूसरे कॉलेजों के प्राचार्य और वरिष्ठ प्राध्यापकों पर भी कार्यभार बढ़ रहा है। राजकीय कॉलेजों में वरिष्ठ प्राध्यापकों की पदोन्नति भी हो चुकी है, अभी तक कॉलेजों में स्टेशन अलॉट नहीं किए गए हैं। इसी तरह एडिड कॉलेजों में भी पिछले काफी समय से स्थाई प्राचार्य नहीं लगाए जा रहे और स्टाफ की भी कमी है।
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छावनी के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भी स्थाई प्राचार्य तैनात नहीं है। यहां संयुक्त निदेशक डॉ. अजीत सिंह को पदभार सौंपा गया है। इसी तरह नारायणगढ़ राजकीय महाविद्यालय में भी प्राचार्य का पद खाली पड़ा है। यहां अंबाला शहर से राजकीय महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. खुशीला को पदभार सौंपा गया है।
इसी तरह राजकीय महिला महाविद्यालय शहजादपुर में भी प्राचार्य का पद खाली पड़ा है, यहां भी एक वरिष्ठ प्राध्यापक को पदभार दिया गया है। छावनी के आर्य गर्ल्स कॉलेज में डॉ. अनुपमा आर्य स्थाई प्राचार्या के पद पर तैनात हैं। इसी तरह एसडी कॉलेज में डॉ. राजेंद्र सिंह भी स्थाई प्राचार्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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इसी तरह शहर के एमडीएसडी कॉलेज में भी अभी कोई स्थाई प्राचार्य तैनात नहीं है। यहां भी वरिष्ठ प्राध्यापक को पदभार सौंपा गया है। डीएवी कॉलेज शहर में भी पिछले कुछ समय से वरिष्ठ प्राध्यापक को ही प्राचार्य का कार्यभार दिया जा रहा है। एसए जैन कॉलेज में स्थाई प्राचार्या डॉ. आभा बंसल तैनात हैं। देव समाज कॉलेज में भी प्रो. मुक्ता अरोड़ा प्राचार्या हैं। यह सेल्फ फाइनेंस कॉलेज है।
शिक्षकों की भी कमी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को भी लागू करने में दिक्कत आ रही : मलिक
हरियाणा कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान दयानंद मलिक ने बताया कि प्रदेश में 97 एडिड कॉलेज चल रहे हैं। बीते वर्षों में सरकार ने एडिड कॉलेज में भर्ती पर बैन लगा दिया था। अब कई जगह ऐसी स्थिति मिलेगी, जहां कुल 53 स्वीकृत पद में से 9 का स्टाफ ही कॉलेज में रह गया है।
2014 में ऑल इंडिया जाट हीरोज मेमोरियल कॉलेज रोहतक में अंतिम भर्ती हुई थी। कॉलेज से प्राचार्य 2017 में सेवानिवृत हुए थे। अभी तक पद खाली पड़ा है। 97 कॉलेज में से 44 कॉलेजों में ही स्थाई प्राचार्य रह गए हैं। कॉलेज में 52 फीसदी पद भरे हुए हैं जबकि 48 फीसदी पद खाली पड़े हैं। यही स्थिति नाॅन टीचिंग स्टाफ की भी है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह और शिक्षा मंत्री को एसोसिएशन ने 31 जनवरी को इन समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपा था। अभी तक इस तरफ सरकार ने ध्यान नहीं दिया। सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू कर रही है, मगर कॉलेजों में बिना स्टाफ के पॉलिसी को लागू करने में दिक्कत आ रही है। कई जगहों तो कॉलेज मैनेजमेंट ने अपने स्तर पर प्रति लेक्चर पर ही स्टाफ को अनुबंध पर लगाया हुआ है।
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