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Ambala News: कोर्ट में पत्नी बोली- गलतफहमी हो गई थी, पति ने नहीं किया प्रताड़ित

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दहेज उत्पीड़न के आरोपी को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में किया बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी

नारायणगढ़। दहेज उत्पीड़न के आरोपों में घिरे एक व्यक्ति को स्थानीय अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। मामला तब कमजोर हो गया जब शिकायतकर्ता पत्नी और उसके पिता ने अदालत में अभियोजन पक्ष के दावों का समर्थन नहीं किया। फैसले के अनुसार, महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी शादी 30 अक्टूबर 2008 को पंजाब के जिला पटियाला निवासी एक व्यक्ति के साथ हुई थी। शादी के 3-4 साल बाद पति और ससुराल वालों ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पति नशे का आदी है और मायके से पैसे न लाने पर पीटता था।
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इस शिकायत के आधार पर महिला थाना नारायणगढ़ में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डॉ. जितेंद्र कुमार की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान उस समय नया मोड़ आया जब मुख्य गवाह (शिकायतकर्ता महिला) ने अपने आरोपों से इन्कार कर दिया। महिला ने कोर्ट में कहा कि उसका अपने पति के साथ केवल कुछ गलतफहमी के कारण मनमुटाव हुआ था। उसने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उसके हस्ताक्षर खाली कागज पर लिए थे। शिकायतकर्ता के पिता ने भी बेटी की बात दोहराई और आरोपी पति के खिलाफ किसी भी तरह के उत्पीड़न की बात से इन्कार किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए हैं।
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