अंबाला सिटी। शहर विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी जंग कई वर्षों से चल रही है। 1967 से लेकर 2019 तक इस सीट पर ज्यादातर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही वर्चस्व की लड़ाई रही है। 1972 की बात करें तो कांग्रेस की लेखवती जैन ने अखिल भारतीय जनसंघ के लक्ष्मी नारायण को 762 वोट के अंतर से हराया था।
शहर विधानसभा सीट पर यह सबसे कम अंतर की जीत थी। इस दौरान लेखवती जैन को 16 हजार 932 और लक्ष्मी नारायण को 16 हजार 170 वोट मिले थे, जबकि तीसरे प्रत्याशी निर्दलीय राजा राम को 316 वोट मिले थे। यह तीन ही प्रत्याशी मैदान में थे। इसके बाद 1991 के चुनाव में दूसरी कम अंतर की जीत रही थी। इस चुनाव में कांग्रेस के सुमेर चंद ने भाजपा के फकीर चंद अग्रवाल को 1 हजार 101 वोट से हराया था। यही नहीं 1987 के बाद 1991 के चुनाव में सबसे ज्यादा 9 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। इनमें छह उम्मीदवार पार्टियों और तीन उम्मीदवार निर्दलीय थे।
ये रही थी दूसरी कम अंतर की जीत
1991 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सुमेर चंद को 20 हजार 489, भाजपा के फकीर चंद अग्रवाल को 19 हजार 388, ऑल इंडिया यूथ अकाली दल के सुखदेव सिंह को 10 हजार 244, जनता पार्टी के ज्ञानचंद को 4 हजार 123, बसपा के अर्जुन दास लिहारसा को तीन हजार 537, एचवीपी के सुरजीत राय वधावन को एक हजार 324, निर्दलीय शिव कुमार को एक हजार छह, अजय कुमार को 768 और सुरिंद्र सूद को 680 वोट मिले थे। कांग्रेस के सुमेर चंद ने भाजपा के फकीरचंद अग्रवाल को एक हजार 101 वोट से हराया था। 1991 के चुनाव के साथ 1987 में भी नौ प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, जबकि इससे पहले और बाद में हुए चुनावों में इतने प्रत्याशी चुनाव में खड़े नहीं हुए।