फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: मुंबई से हो रही सोने के बिस्कुटों की तस्करी

विज्ञापन
सोने के बिस्कुट को पिघलाकर कोटा में तैयार किए आभूषण। आरपीएफ
विज्ञापन
अंबाला। ट्रेनों के माध्यम से हो रही सोने की तस्करी का खेल नया नहीं बल्कि काफी पुराना है। पूर्व में भी मुखबिरों की सूचना पर ट्रेनों में छापामारी करते हुए कई बार सोने के आभूषण और बिस्कुट भी पकड़े जा चुके हैं। इस बार आरपीएफ ने अपने स्तर पर इस धंधे पर लगाम लगाने की योजना तैयार की थी और पूरे उत्तर रेलवे में इसे लेकर एक साथ ट्रेनों में छापामारी अभियान चलाया गया। इससे तस्करों में डर का माहौल पैदा हो गया है और अब वो दूसरे विकल्पों और रास्तों की तलाश में जुट गए हैं।
विज्ञापन

तस्करों ने खोले राज
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए तस्करों ने प्राथमिक जानकारी में जो बताया है, उससे इनकम टैक्स विभाग के भी होश उड़ गए हैं। सोने के आभूषणों की तस्करी का खेल काफी पुराना है। मुंबई से आए सोने के बिस्कुटों को पिघलाकर राजस्थान के कोटा में आभूषण तैयार किए जाते हैं जोकि फिर पंजाब और हिमाचल के अलग-अलग व्यापारियों को बेचे जाते हैं।
जिन लोगों को सोने की तस्करी में लगाया जाता है, उन्हें भी योजनाबद्ध तरीके से काम पर लगाया जाता है जिससे मुख्य आरोपी का नाम सामने न आए और तस्करी का खेल चलता रहे। तस्करों को प्रत्येक डिलीवरी के लिए 10 से 15 हजार रुपये मिलते थे। वो आभूषण लेने के लिए एसी कोच में ही सफर करते थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में न आ सकें।
विज्ञापन


मुंबई और बिहार से आने वाली ट्रेनों में नजर
मुंबई में सोना तस्करी का एक बहुत बड़ा कारोबार है। देश के सभी व्यापारी यहीं से अपना कारोबार करते हैं। जबकि बिहार ड्राई क्षेत्र है इसलिए यहां शराब की तस्करी का धंधा जोरों-शोरो से फल रहा है। अमृतसर से मुंबई और चंडीगढ़ से बिहार का लिंक जोड़कर ही आरपीएफ अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है। वहीं आरपीएफ ने मुंबई और बिहार के बीच चलने वाली ट्रेनों की सूची तैयार की है जिससे इन ट्रेनों की विशेष निगरानी की जा सके।
यह है खामियां
अंबाला कैंट स्टेशन की बात करें तो यह सुरक्षा के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। स्टेशन पर लगा एकमात्र लगेज स्कैनर पिछले आठ माह से खराब है। वहीं, पार्सल कार्यालय में आने वाले सामान को भी अंदाजे और व्यापारी की ओर से दिए गए दस्तावेजों के आधार पर सही मानकर बुक र लिया जाता है, फिर चाहे इसके अंदर कोई संदिग्ध सामान ही क्यों न हो। क्योंकि लगेज स्कैनर न होने की वजह से पार्सल की भी जांच नहीं हो पाती और आसानी से सामान एक से दूसरी जगह पर पहुंच जाता है।
खुद सामान लेकर सफर करते हैं व्यापारी
दिल्ली सहित देश के दूसरे राज्यों से बिना बिल के सामान लाने का जरिया ट्रेनें ही हैं। रोजाना लाखों रुपये का बिल के सामान ट्रेनों के माध्यम से एक से दूसरी जगह पर पहुंचता है। अंबाला छावनी में भी दर्जनों लोग दिल्ली से वाहनों सहित अन्य सामान लेने के लिए ट्रेन से सफर करते हैं और ट्रेन के माध्यम से ही सामान लेकर वो अंबाला छावनी स्टेशन पर उतरते हैं, लेकिन उनके सामान की जांच व बिल पूछने वाले अधिकारी नदारद रहते हैं।
प्रीमियम ट्रेनों पर नजर
प्राप्त जानकारी अनुसार आरपीएफ प्रीमियम ट्रेनों जैसे शताब्दी, राजधानी और वंदे भारत एक्सप्रेस पर भी नजर जमाए हुए हैं जिससे इन ट्रेनों से अगर आभूषणों या नगदी की तस्करी हो रही हैं तो उस पर भी शिकंजा कसा जा सके। इसके लिए भी मुखबिरों को पूरी तरह से अलर्ट रहने के निर्देश विभागीय अधिकारियों की तरफ से दिए गए हैं।
प्राथमिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सोने की तस्करी का खेल पिछले काफी समय से चल रहा था। लेकिन अब आरपीएफ की टीमें लगातार तस्करों पर शिकंजा कस रही हैं। पिछले जो दो मामले सामने आए हैं वो मुंबई से अमृतसर जाने वाली पश्चिम और स्वराज एक्सप्रेस से जुड़े पाए गए हैं और कोटा स्टेशन आभूषण बनाने का केंद्र है। यह खुलासा इनकम टैक्स विभाग की पूछताछ के दौरान हुआ है।
विज्ञापन

जावेद खान, प्रभारी आरपीएफ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें