अंबाला। विशेष ट्रेनों की चाल नहीं सुधर रही और यात्री बेहाल हो रहे हैं। न उन्हें रेलवे के पूछताछ केंद्र पर विशेष ट्रेनों की सही जानकारी मिल रही है और ही रेलवे के एप। इसलिए उन्हें घंटों ट्रेन के इंतजार में स्टेशन पर बैठना पड़ रहा है।
स्टेशन पर मौजूद रेलवे अधिकारियों के पास भी इसका कोई जवाब नहीं है। ऐसे ही हालात रविवार को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर देखने को मिले। जब चंडीगढ़ से धनबाद और चंडीगढ़ से वाराणसी जाने वाली विशेष ट्रेन के यात्री हैरान परेशान नजर आए।
पटियाला से आई महिला यात्री सुजाता ने बताया कि उन्हें ट्रेन नंबर 03312 से लखनऊ जाना था। ट्रेन के अंबाला से चलने का समय सुबह 6:45 बजे का था। इसलिए वो टैक्सी से सुबह 6 बजे अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। यहां आकर जानकारी मिली कि ट्रेन दो घंटे लेट है। जब दोबारा पूछताछ केंद्र पर गए तो फिर बताया गया कि ट्रेन दो घंटे लेट है। इसी उधेड़-बुन में दोपहर के तीन बजे गए और ट्रेन लगभग 8:30 घंटे की देरी से दोपहर 3.20 पर अंबाला कैंट पहुंची।
ट्रेन साढ़े पांच घंटे लेट
राजपुरा से आए प्रेमचंद ने बताया कि उन्हें वाराणसी जाना था। अंबाला से ट्रेन नंबर 04205 के चलने का समय सुबह 10:15 बजे का था लेकिन ट्रेन की जानकारी नहीं मिल रही थी। जब भी पूछताछ केंद्र पर गए तो एक ही जवाब मिला, ट्रेन जल्दी आ जाएगी। जबकि पूछताछ केंद्र पर लगी स्क्रीन पर ट्रेन के आने का सही समय दर्शाया जा रहा था जोकि गलत था। ट्रेन दोपहर 3:37 बजे प्लेटफार्म एक पर आई तो उन्हें राहत मिली। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि अगर विशेष ट्रेनों को इतनी देर से चलाना है तो उन्हें बंद कर देना चाहिए।
मोबाइल पर नहीं आया संदेश
चंडीगढ़-धनबाद और वाराणसी की तरफ जाने वाली दोनों ट्रेनों के यात्रियों में इस कारण भी रोष था कि ट्रेन के देरी से चलने की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। अगर उन्हें ट्रेन के देरी से आने की जानकारी पहले मिलती तो वो घर पर ही रुक जाते, न कि स्टेशन पर आकर परेशान होते।
दो ट्रेनें की थीं रद्द
रेलवे ने देरी से चलने के कारण पिछले सप्ताह ही दो विशेष ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया था। इसमें बठिंडा से वाराणसी के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 04520 और चंडीगढ़ से लखनऊ के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 04210 शामिल हैं जोकि 18 जून से 10 जुलाई तक रद्द कर दी गई हैं।
वर्जन
विशेष ट्रेनों का संचालन एक ही रैक (ट्रेन के कोच) के आधार पर किया जाता है। जब एक रैक गंतव्य से वापस आता है तो उसे साफ व दुरुस्त करके पुन: संचालित किया जाता है। जब रैक पीछे से ही देरी से आए तो वो जाएगा भी देरी से क्योंकि दो से ढाई घंटे तो रैक को चैक करने में ही लग जाते हैं कि इनमें कोई गड़बड़ी तो नहीं है।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला।