अंबाला सिटी। जिला बीते वर्ष के मुकाबले जिले में लिंगानुपात कम हो गया है। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 953 था तो वहीं अब यह घट कर इस वर्ष 913 पर आ गया है। इसका मुख्य कारण अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर दबिश में कमी आना है। वर्ष 2024 में विभाग ने सिर्फ तीन केंद्रों पर दबिश दी।
जिसमें तीनों ही मामले कोर्ट में चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद से एक भी केंद्र में दबिश नहीं दी है। इसका असर आंकड़ों पर दिखने लगा है।
दूसरे राज्यों में जा रहे लोग
अंबाला से लोग भ्रूण जांच करवाने के लिए दूसरे राज्यों पंजाब और उत्तर प्रदेश में जाते हैं। इस कारण कई बार महिलाएं विभाग की आंखों से बच जाती हैं। ऐसे में पड़ोसी राज्यों में दबिश और भी जरूरी हो जाती है। लेकिन विभाग की ओर से इन दिनों रेड न होने के कारण आंकड़ा घटता जा रहा है।
इन क्षेत्रों में घटा अनुपात
जिला अंबाला में पंजोखरा साहिब पीएचसी में सबसे कम लिंगानुपात की दर दर्ज की गई है। यहां पर प्रति एक हजार लड़कियों पर सिर्फ 773 लिंगानुपात रह गया है। नियमों के अनुसार 900 से कम लिंगानुपात वाले आंकड़ों को पिछड़े क्षेत्र में गिना जाता है। साहा में 867 लिंगानुपात रहा। जबकि साहा को वर्ष 2022 में एक हजार के आंकड़े के लिए सबसे बेहतरीन अनुपात के लिए पुरस्कार दिया गया था। इसके अलावा नग्गल में 879, बराड़ा में 879, बिहटा में 872, केसरी में 846, नन्यौला में 859 और भूरेवाला में 841 लिंगानुपात रह गया है।
तीन माह में सभी सेंटरों की होगी जांच
नोडल अधिकारी डॉ विपिन भंडारी ने बताया कि तीन महीने में विभाग जिले के प्रत्येक अल्ट्रासाउंड केंद्र की जांच करेगा। इसके साथ ही दूसरे राज्यों में भी दबिश देने के लिए प्रणाली बनाई जा रही है। जैसे ही नए एजेंट मिलेंगे तो दबिश भी शुरू होगी। जिला अंबाला में 85 केंद्र हैं। इनमें से नारायणगढ़ और अंबाला सिटी के केंद्रों की जांच पूरी हो चुकी है।