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Ambala News: सीएम के गांव में प्राइमरी स्कूल की चटक रही छत, टपकते पानी के बीच पढ़ रहे नौनिहाल

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अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद - फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।
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अंबाला। सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा का दावा करती हो पर हकीकत कुछ और ही है। जिले में कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जो सरकार के दावों पर खरे नहीं उतरते। अब नारायणगढ़ के मिर्जापुर गांव के प्राइमरी स्कूल को ही लीजिए। इस स्कूल की व्यवस्थाओं से सरकार के दावों पर पूरी तरह पानी फिरता नजर आता है। यहां पर एक कक्षा कक्ष में कक्षा एक से लेकर पांच तक की बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल का बरामदा हो या कक्षा दोनों ही स्थानों की छत क्षतिग्रस्त है और इनमें से पानी रिस रहा है।
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हालात यह हैं कि बच्चे टपकते पानी के बीच पढ़ाई कर रहे हैं, इसके साथ ही कक्षा का लिंटर कभी भी गिर सकता है। स्कूल के चारों तरफ जंगल है। शिक्षक ने जर्जर भवन को लेकर शिक्षा विभाग को जानकारी दी है मगर शिक्षा विभाग अब तक कोई सार्थक कदम नहीं उठा सका। यह स्कूल सीएम नायब सैनी के पैतृक गांव में है। लोगों को उम्मीद थी कि गांव के बेटे के सीएम बनने पर सरकारी स्कूल के दिन बदलेंगे मगर ऐसा नहीं हुआ बल्कि अब इस स्कूल में 28 बच्चे ही शेष रह गए हैं। गांव के बच्चे प्राइवेट स्कूल की ओर रुख कर गए हैं। इस स्कूल के हालात तब हैं जब कुछ समय पहले ही मिर्जापुर गांव में प्रशासन ने रात्रि दरबार लगाया था।


सफाई कर्मचारी नहीं, शिक्षकों के पद भी खाली

शनिवार को मिर्जापुर प्राइमरी स्कूल में जाने पर पता चला कि यहां पर बाल वाटिका से लेकर पांच तक की कक्षाएं लगती हैं वह भी एक ही कक्ष में लग रही हैं। स्कूल में सफाई कर्मचारी नहीं है। इस कारण से खेल के मैदान में लंबी लंबी घास उगी है। ग्रामीणों को डर लगता है कि कहीं उनके बच्चों को सांप कीड़ा न काट ले, वहीं एक ही शिक्षक स्कूल संभाल रहे हैं। शनिवार को वह भी अवकाश पर थे उनके स्थान पर पास के ही गांव से एक शिक्षक को तैनात किया गया था।
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जानवरों की तरह पानी की हौंदी, आरओ तक नहीं

यहां बच्चों को टंकी का पानी पीने को दिया जा रहा है। इसी से मिड डे मील बनता है। बच्चों के पानी के लिए एक आरओ सिस्टम तक नहीं है। वहीं पानी की जो हौदी बनाई है वह भी जानवरों की तरह दिखाई देती है, इसलिए कम ही बच्चे यहां पानी पीने जाते हैं। इसी प्रकार शौचालय की हालत भी खराब दिखी। शौचालय काफी गंदी हालत में थे, जिनमें बच्चे अगर जाते हैं तो वह बीमार भी हो सकते हैं।




स्कूल का रिपोर्ट कार्ड

- स्कूल में शिक्षकों के पद- 02
- स्कूल में शिक्षकों की तैनाती- 01
- सफाई कर्मचारी नहीं है।

- खेल का मैदान है मगर उसमें झाड़ियां उगी हैं।

- स्कूल का भवन काला पड़ चुका है।

- बच्चों के झूले भी नहीं हैं।

- स्कूल में चौकीदार भी नहीं है।

- अग्निशमन यंत्र भी नहीं दिखे।

- स्कूल को वर्ष में 10 हजार रुपये ही मेंटीनेंस के मिलते हैं वह कम पड़ते हैं।





स्कूल की तरफ से चहारदीवारी, नए कक्षा कक्ष बनाने की मांग की गई थी जोकि लंबित है। यहां एक ही शिक्षक तैनात है। स्कूल का भवन जर्जर है पानी टपक रहा है जिसमें पढ़ाना मुश्किल है। मुझे आज पास के स्कूल से यहां तैनात किया गया है यहां कम से कम दो शिक्षक होने चाहिए। शिक्षकों पर काफी लोड है।
-मनोज कुमार, शिक्षक


बीईओ के माध्यम से हमारे पास जो भवन के प्रस्ताव आता है। अगर इस स्कूल का भेजा है तो हम आगे भेज चुके होंगे। जहां तक स्कूलों में शिक्षकों की कमी की बात है तो हमारे यहां 200 स्कूल हैं जहां पर सिर्फ एक ही शिक्षक तैनात हैं। शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है।
-सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षाधिकारी, अंबाला

अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद- फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।

अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद- फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।

अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद- फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।

अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद- फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।

अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद- फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।

अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद- फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।

अंबाला। मिर्जापुर में स्कूल के मैदान में उगी घास। संवाद- फोटो : कानपुर- लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास क्षतिग्रस्त सड़क।

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