अंबाला सिटी। श्री कबीर आश्रम मोती नगर में चल रही पितृ प्रसन्नार्थम श्रीमद्भागवत सप्ताह अमर कथा में साध्वी रमा शास्त्री महाराज ने कहा कि भगवान की प्राप्ति करना अभिमानी के लिए आसान नहीं है। अभिमानी व्यक्ति हमेशा स्वार्थों में बहकर भगवान की शरण में पहुंचता। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से भगवान की शरण में पहुंचता है वह भगवान के अति प्रिय होते हैं। भगवान की भक्ति करने के लिए मन में श्रद्धा का भाव होना बहुत जरूरी है।
ब्रह्मा जी को भगवान श्रीकृष्ण की लीला को समझने में चूक हुई। ब्रह्मा जी सोचने लगे ये कैसे भगवान हैं जोकि गोपाल बालों के साथ उठते-बैठते हैं और उनका झूठा खा-पी लेते हैं। ब्रह्मा जी ने सोचा कि मैं ही सबसे बड़ा सृष्टि का रचयिता हूं। ब्रह्मा जी को अभिमान हुआ। इसी प्रकार इंद्र को अभिमान हुआ था कि मैं ही सबसे बड़ा हूं। सृष्टि का पहिया मेरी कृपा से ही चल रहा है। साध्वी ने कहा कि पहले सतयुग में भगवान विष्णु की पत्नी समुद्र से उत्पन्न लक्ष्मी थी। वहीं भगवान विष्णु व लक्ष्मी त्रेतायुग में भगवान श्रीराम व सीता बनकर आए। द्वापर में भगवान विष्णु, श्रीराम श्रीकृष्ण का अवतार लेकर और लक्ष्मी सीता व रुकमणी बनकर आती हैं। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण-रुकमणी की बरात भगवान की जयकारों, ढोल व आतिशबाजी करते हुए नाचते-गाते कथा स्थल पर पहुंची।
जहां पंडित रविन्द्र नाथ तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चारण कर जयमाला डलवाई। कथा के मुख्य यजमान ज्ञानो देवी पुंडीर, जूली पुंडीर, सुदेश चौहान ने कन्यादान की रस्म अदा की। यजमान भक्तों ने फूलो की वर्षा कर विवाह समारोह में भाग लिया। श्रीकृष्ण बने खुशी व रुकमणी बनी वैष्णवी ने सुंदर नृत्य करके सभी का मन मोह लिया। सनातन चैतन्य महाराज ने विवाह समारोह के दौरान भव्य स्वागत किया। इस मौके पर सुनीलदत्त शर्मा, बबीता शर्मा, सरदार कृपाल सिंह, आशा राघव, बलविन्द्र शर्मा, बबली, मोहनी पाली, प्यारे लाल, किरण बाला आदि मौजूद रहीं।