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नए समीकरणों ने उड़ाई प्रतिद्वंद्वी विधायकों की नींद

Sun, 18 May 2014 12:00 AM IST
मोहित धुपड़
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अंबाला सिटी। लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद अंबाला के चारों विधानसभा क्षेत्रों में अब नए समीकरण उभरकर सामने आ गए हैं।
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इन विधानसभाओं क्षेत्रों में कैंट को छोड़कर जहां मुलाना, नारायणगढ़ और अंबाला शहर में काफी समय से भाजपा अपनी जमीन तलाश रही थी, वहीं मोदी की इस लहर ने न केवल भाजपा को वह जमीन हासिल करवाई है, बल्कि हर विधानसभा क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में जबरदस्त लीड भी दिलवाई है।

अब सबसे बड़ी चुनौती इस बात की रहेगी कि मोदी लहर का यह जलवा हरियाणा में अक्तूबर 2014 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव तक कैसे बरकरार रहता है? उधर, अचानक सभी विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की इतनी बड़ी जीत प्रतिद्वंद्वी नेताओं के गले नहीं उतर रही है। उन्हें लोकसभा चुनाव में विधानसभा वाइज भाजपा की यह जीत अपने लिए आगामी विधानसभा चुनाव में खतरे की घंटी प्रतीत हो रही है। इसके चलते सभी पार्टियों के विधायकों और पूर्व विधायकों ने विधानसभा चुनाव के लिए अपनी-अपनी रणनीति नए सिरे से बनाने का फैसला किया है।
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अंबाला कैंट में और मजबूत हुई भाजपा
अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र में इस वक्त भाजपा के विधायक अनिल विज हैं। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे थे कांग्रेस के निर्मल सिंह। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव पर यदि नजर डालें तो अंबाला कैंट में 100018 लोगों ने वोट डाला था और 13 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा ने हजकां और इनेलो से हटकर अकेले ही चुनाव लड़ा था। मुख्य मुकाबला अनिल विज और निर्मल सिंह का था। कांटे की टक्कर में अनिल विज ने 49219 मत हासिल कर निर्मल सिंह को हराया था। निर्मल सिंह को 42881 मत हासिल हुए थे। इसके अलावा बसपा के प्रवीण चौहान को 3065, इनेलो के केडी सिंह को 2189, हजकां के सुच्चा सिंह को 297 वोट मिले थे लेकिन अब वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने अंबाला कैंट में भाजपा की मजबूती को और बढ़ा दिया है। भाजपा का वोट बैंक यहां पांच साल में मोदी लहर के सहारे 49219 से बढ़कर 61501 हो गया है। इससे निर्मल सिंह की चिंता बढ़ी गई है, इसीलिए उन्होंने 20 मई को कांग्रेस भवन में बैठक बुलाई है।


नारायणगढ़ में आठ गुना बढ़ गया वोट बैंक
नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में दो बार जीत के बाद कांग्रेस के विधायक रामकिशन गुर्जर ‘हैट्रिक’ बनाने का सपना देख रहे थे, लेकिन मोदी की लहर ने उनके सपनों के आगे चुनौतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। उधर, इस हलके में कई साल से अपनी मजबूत जमीन तलाश रही भाजपा के पंख ऐसे लगे हैं कि उनका वोट बैंक यहां लगभग आठ गुना बढ़ गया है। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत जब्त करवाने वाले नायब सिंह सैनी (जिलाध्यक्ष  भाजपा)  8082 वोट हासिल कर काफी पिछड़ गए थे। कांग्रेस के रामकिशन गुर्जर ने 37298 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी जबकि बसपा के अर्जुन सिंह को 15404, इनेलो के राम सिंह कोड़वा को 28978 व हजकां के भूम सिंह राणा को 3028 वोट मिले थे। मैदान में 13 प्रत्याशी थे और कुल 116039 लोगों ने अपने मत का इस्तेमाल किया था। अब लोस चुनाव में अचानक नारायणगढ़ हलके में भाजपा का वोट बैंक 8082 से बढ़कर 62781 पहुंच गया है जिस वजह से मौजूदा विधायक समेत अन्य प्रतिद्वंद्वी नेताओं के होश उड़े हुए हैं, इसीलिए प्रतिद्वंद्वी अपनी नई रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

अंबाला शहर में शर्मा के किले को भेदा
अंबाला शहर पहले से ही भाजपा का गढ़ रहा है। जमीन से जुड़े पूर्व विधायक स्वर्गीय मास्टर शिव प्रसाद की हैट्रिक पर तो आज भी शहर भाजपा इतराती है। चौथी बार मास्टर जी ने चुनाव नहीं लड़ा था। उसके बाद पूर्व विधायक वीणा छिब्बर, हेडमास्टर फकीरचंद का भी जलवा रहा लेकिन वर्ष 2005 में विधायक विनोद शर्मा ने भाजपा के इस गढ़ में सेंधमारी कर पहली बार इस सीट से किसी भाजपा विधायक की जमानत जब्त करवाकर रिकार्ड जीत हासिल की। वर्ष 2009 में भी शर्मा का विजयी अभियान जारी रहा और फिर इस सीट से भाजपा विधायक की जमानत जब्त हुई और शर्मा रिकार्ड 69435 मत हासिल कर जीत गए। उनके मुकाबले में शिअद की चरणजीत कौर ने 33885, भाजपा के डाक्टर संजय शर्मा को 12741, हजकां के पूर्ण प्रकाश को 2736, बसपा के मक्खन सिंह को 10719 मत हासिल हुए थे। जबकि 131571 लोगों ने यहां मतदान किया था और दस प्रत्याशी मैदान में थे। अब मोदी की इस आंधी ने शहर विधायक विनोद शर्मा के किले को भेदकर रख दिया है। अब भाजपा चाहे तो विधानसभा चुनाव तक ऐसी ही परफोरमेंस कायम रखते हुए शहर में दोबारा अपना गढ़ हासिल कर सकती है, क्योंकि भाजपा ने यहां अपने वोट बैंक को पांच साल में 12741 से बढ़ाकर 74416 तक पहुंचा दिया है।
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मुलाना में फीके कमल को मिली है चमक
मुलाना विधानसभा सीट पर भाजपा की जीत एक सपने से कम नहीं है, क्योंकि यहां ऐसे बहुत कम मौके आए हैं, जब भाजपा का वोट बैंक दस हजार तक पहुंचा है। अमूमन भाजपा प्रत्याशी यहां दस हजार से कम का आंकड़ा छू पाते हैं, क्योंकि यह गढ़ हमेशा से ही कांग्रेस और इनेलो का रहा है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना यहां 2005 में जीते थे, जबकि 1999 में पूर्व मंत्री इनेलो विधायक चौधरी रिसाल सिंह जीते थे।  वर्ष 2009 में फिर रिसाल सिंह के बेटे राजबीर बराड़ा ने 47185 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। इस सीट पर उन्होंने प्रदेश कांग्रेेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना को पराजित किया था। मुलाना को 44248 वोट मिले थे। जबकि भाजपा के मांगेराम पंजैल को 4954, बसपा के प्रकाश राम भारत को 28113 व हजकां के अमरनाथ को 2173 वोट हासिल हुए थे। यहां 129730 मतदाताओं ने वोट डाले थे और 11 प्रत्याशी मैदान में थे। अब वर्ष 2014 के लोस चुनाव में मोदी की आंधी इस सीट के तमाम धुरंधरों के होश फाख्ता कर गई है और भाजपा का वोट बैंक 4954 से उठाकर 58622 तक पहुंचा दिया है। जिससे प्रतिद्वंद्वी सकते में हैं।
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