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मंत्री को रास नहीं आई अफसरों की प्लानिंग

Sun, 28 Jun 2015 12:22 AM IST
अंबाला /अमर उजाला ब्यूरो
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कैंट की अनाज मंडी, सब्जी मंडी और चारा मंडी को कैंट से दूर हाईवे पर स्थित गांव बुहावा में ले जाने की कसरत और तेज हो गई है। करीब पांच सालों से राजनीति में फंसे इस प्रोजेक्ट की लेटलतीफी ने सेहत मंत्री और कैंट विधायक अनिल विज को भड़का दिया है।
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गुस्साए विज ने मार्केटिंग बोर्ड के एक्सईएन को चेतावनी दे दी कि सितंबर तक इस अनाज मंडी का काम पूरा हो जाना चाहिए। इस सीजन का धान वे इसी अनाज मंडी में गिरवाना चाहते हैं।

 मार्केटिंग बोर्ड के अफसरों ने भी मंरी के रुख को देखते हुए सितंबर तक अनाज मंडी तैयार करने की बात कही है।
अफसरों की चिंता बढ़ी

इस विशेष प्रोजेक्ट को करीब पांच साल पहले तैयार किया गया था। इसके तहत अंबाला कैंट में बाजारों के बीच स्थित अनाज मंडी, बस स्टैंड के साथ स्थित सब्जी और चारा मंडी को अंबाला कैंट से बाहर बुहावा गांव की जमीन पर शिफ्ट किया जाना था।
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करीब 33 करोड़ रुपये से मंडी को 33 एकड़ जमीन पर तैयार किया जा रहा है। यहां अनाज मंडी, सब्जी मंडी और चारा मंडी के साथ फड़ी लगाकर मांस बेचने वालों को भी जगह मिलेगी।

यहां 120 दुकानें अनाजमंडी के आढ़तियों, 94 दुकानें सब्जी मंडी के आढ़तियों और 10 दुकानें चारा मंडी के आढ़तियों के लिए बनाई जानी है।

मार्केटिंग बोर्ड के अफसरों ने इस परियोजना का खाका दो से तीन बार रिवाइज्ड किया है। उसी के अनुसार काम चल रहा है। अनिल विज अफसरों की इस प्लानिंग और उनके खाके से नाखुश हैं। विज ने शनिवार को निर्माणाधीन बुहावा मंडी का दौरा किया और नक्शे को देखा।

वह अफसरों की प्लानिंग से संतुष्ट नहीं हो पाए। उन्होंने फिर से नक्शे में बदलाव करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।

मंत्री चाहते हैं ये बदलाव
-मंत्री ने परियोजना का नक्शा देखने के बाद अफसरों से किसानों के लिए शौचालय के बारे में पूछा। इस पर अफसरों ने बताया कि 33 एकड़ में दो शौचालय बनाए गए हैं। इस पर अनिल विज उखड़ गए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भले ही दुकान कम हो जाएं, लेकिन मंडी में तीन से चार शौचालय बनवाए जाएं।
-वर्तमान प्लान में सब्जी मंडी में कोल्ड स्टोरेज का प्रावधान नहीं हैं।

इस पर अनिल विज ने अधिकारियों से कहा कि किसान अपनी सब्जियां और फल कहां सुरक्षित रखेंगे। कोल्ड स्टोर का होना जरूरी है। इसलिए इसका भी प्रावधान करवाया जाए।

-मंत्री ने अफसरों से किसानों के लिए रेस्ट हाउस और पीने के पानी की व्यवस्था के बारे में पूछा। साथ ही निर्देश दिए कि प्लानिंग में पानी और रेस्ट हाउस का भी और बेहतर प्रबंध किया जाए।

-मंत्री ने मंडी में बनाए गए मौजूदा शेड्स को भी छोटा बताया। लेकिन, ये बन चुकें है। इसलिए अफसरों ने मंत्री को आश्वस्त किया कि ये शेड्स फिलहाल पर्याप्त रहेंगे।


यूं झलका मंत्री का दर्द
मंत्री अनिल विज ने अफसरों से कहा कि इस परियोजना को हर हाल में सितंबर तक पूरा करो, ताकि वे सीएम से इसका उद्घाटन  करवाएं। वे दस सालों से इस परियोजना के पीछे लगे हैं।

दो बार उन्होंने अलग-अलग जगहों को मंडी के लिए चिह्नित किया था। एक बार तो शिलापट्ट भी रखवा दिया था। मगर पूर्व कांग्रेस सरकार ने उस जगह को रद करके इस मंडी को बुहावा गांव में शिफ्ट करवा दिया। इसके बाद भी काम पांच साल से अटका हुआ है। अब इस बार का धान इसी मंडी में आएगा।

अभी ये है मौजूदा मंडियों के हालात
-अनाज मंडी अभी कैंट के बीचोंबीच बाजार में है। सीजन में जाम लगा रहता है। मंडी छोटी होने की वजह से यहां से उठने वाली धूल से लोग भी बीमार रहते हैं। बहुत लोगों को एलर्जी भी हो चुकी है।

-थोक सब्जी मंडी बस स्टैंड के पास है। छोटी मंडी होने की वजह से गंदगी रहती है। गंदगी के बीच बैठकर ही सब्जियां बेची जाती हैं। एक गाड़ी अंदर जाने पर घंटों जाम लगा रहता है।
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-चारा मंडी भी बस स्टैंड के पास छोटी सी जमीन पर है। यहां भी ट्रॉलियों की संख्या ज्यादा रहती है। इस वजह से सड़क हादसे भी हो चुके हैं

-रेहड़ी पर मांस बेचने वाले भी सड़क किनारे फड़ी लगा लेते हैं। इससे माहौल खराब रहता है। सड़क पर ही रखकर जानवर काटते हैं।
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