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Ambala News: अवैध होर्डिंग का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

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अंबाला चंडीगढ एनएच 44 नेशनल हाइवे के किनारे लगे होर्डिंग। संवाद
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वैभव शर्मा
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अंबाला सिटी। दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक राजमार्ग पर अवैध होर्डिंग का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में अंबाला सहित अन्य जिलों के डीसी को पार्टी बनाया है।
आलम यह है कि नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में पड़ने वाले क्षेत्रों में अवैध होर्डिंग लगे हैं। इन्हें अभी तक हटाया नहीं गया। इन अवैध होर्डिंग्स के लिए राजमार्गों से गुजरने वाले लोगों का ध्यान भटकता है और हादसे होने की संभावना रहती है। अमर उजाला ने बुधवार को एनएच 44 यानी दिल्ली-चंडीगढ़ राजमार्ग पर अंबाला से सद्दोपुर तक पड़ताल की।
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इसमें पाया कि नगर निगम अंबाला सीमा क्षेत्र में अवैध होर्डिंग की भरमार है। यह अवैध होर्डिंग राजमार्ग के दोनों तरफ नगर निगम के क्षेत्र में लंबे समय से लगे हुए हैं। हैरानी की बात है कि अब जब हाईकोर्ट में चल रहे मामले में डीसी अंबाला खुद पार्ट बने हैं, उन्हें खुद जवाब देना पड़ रहा है। इतने पर भी धरातल पर स्थिति जस की तस है। इस संबंध में उपायुक्त अंबाला से भी बात करने के लिए फोन पर संपर्क किया गया मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका।

बलदेव नगर क्षेत्र में सर्वाधिक होर्डिंग्स

पड़ताल में सामने आया कि सबसे अधिक अवैध होर्डिंग बलदेव नगर क्षेत्र में लगे हैं। यहां कालका चौक से लेकर बलदेव नगर तक राजमार्ग के दोनों तरफ व्यापारिक प्रतिष्ठानों के ऊपर बड़े-बड़े लोहे के एंगल पर अवैध होर्डिंग लगाए हैं। यह हाल सद्दोपुर तक दिखाई देता है। इसी प्रकार बड़े शॉपिंग कांम्प्लेक्सों ने भी अपने यहां अत्यधिक विज्ञापनों से मुनाफा कमाने के लिए बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए हैं। हैरानी की बात है कि समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय विभिन्न जनहित याचिका में सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर अवैध होर्डिंग को राजमार्गों से हटाने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद किसी ने गौर तक नहीं किया।

निगम से विज्ञापन के लिए 20 साइटें ही स्वीकृत

नगर निगम क्षेत्र से जुड़ी विज्ञापन की साइटों पर गौर करें तो करीब 20 साइटें भी विज्ञापन होर्डिंग के लिए वैध हैं। जाेकि शहर में यूनिपोल लगे हैं। बाकी एनएच 44 पर लगे होर्डिंग अवैध रूप से लगाए गए हैं। इसमें बड़े प्रतिष्ठानों ने भी अपने प्रतिष्ठान की छतों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग भी अवैध हैं।



सुप्रीम कोर्ट ने दिया था पूर्व में आदेश

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका में सुनवाई के दौरान आदेश दिए गए थे कि देश के सभी राजमार्गों से अवैध होर्डिंग हटने चाहिए। मगर हर बार जब भी इस प्रकार के आदेश आते हैं तो संबंधित विभाग शुरुआती कार्रवाई कर मुद्दे को भूल जाते हैं। असल में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला तो यह देखकर दिया था कि राजमार्गों पर अवैध होर्डिंग हटने से सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी मगर असल में इन अवैध होर्डिंग से संबंधित विभागों को भी लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। क्योंकि इन होर्डिंग से संबंधित संपत्ति के मालिक तो अच्छा खासा राजस्व कमा रहे हैं मगर संबंधित विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली से उन्हें कुछ नहीं दे रहे।

अब हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता एसएस साहू ने बताया कि दिल्ली चंडीगढ़ एनएच 44 पर अवैध होर्डिंग को लेकर हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। जिसमें संबंधित जिलों के उपायुक्तों को पक्षकार बनाया गया है। उद्देश्य यही है कि किसी भी प्रकार से राजमार्ग पर अवैध होर्डिंग्स से होने वाली दुर्घटनाओं पर कमी लाई जाएगी।



वर्जन



हमने राष्ट्रीय राजमार्गों के पुलों पर लगे अवैध होर्डिंग को हटा दिया है। वैसे भी समय समय पर हम अभियान चलाकर होर्डिंग को हटाते हैं और लोगों को भी मना करते हैं।
-आसिम बंसल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई


हमारे पास कुल 20 साइटें भी विज्ञापन के होर्डिंग के लिए कानूनी रूप से स्वीकृत हैं। बाकी सभी साइटों पर अवैध रूप से अवैध होर्डिंग लगाए गए हैं। इन्हें जल्द हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
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- सहजप्रीत, जेई, नगर निगम

अंबाला चंडीगढ एनएच 44 नेशनल हाइवे के किनारे लगे होर्डिंग। संवाद

अंबाला चंडीगढ एनएच 44 नेशनल हाइवे के किनारे लगे होर्डिंग। संवाद

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