संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सेक्टर-10 हाउसिंग बोर्ड कालोनी में शनिवार उस समय हड़कंप मच गया, जब तबीयत बिगड़ने के बावजूद होम आइसोलेट कोरोना संक्रमित महिला व उनकी बेटियों ने अस्पताल जाने से साफ इंकार कर दिया। देखते ही देखते मामला स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों के समक्ष पहुंचा तो विभाग की टीम सहित पुलिस मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे तक स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम ने महिला की दोनों बेटियों को समझा-बुझाकर महिला को छावनी के नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया।
महिला के बड़ी बेटी का दावा था कि 23 अप्रैल को मां और छोटी बगन संक्रमित आई थीं, 29 अप्रैल से 5 मई तक अस्पताल में अव्यवस्थाओं के बीच काफी परेशानी झेलनी पड़ी। 5 मई को अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल डायलिसिस के लिए भेजा दिया। मां खुद को सुरक्षित महसूस न करने के कारण घर लौट आई थी। होम आईसोलेट की टीम दोबारा लेने पहुंची। ऐसे में उन्हें बिल्कुल भी विश्वास नहीं है कि उनकी मां अस्पताल में सुरक्षित रहेगी कि नहीं।
यह था पूरा मामला
महिला की बड़ी बेटी कहना था कि 23 अप्रैल को मां व छोटी बहन संक्रमित हुए थे। दोनों होम आईसोलेट थे। 26 अप्रैल को विटामिन सी व अन्य दवाएं ले लीं। मां की अचानक शुगर बढ़ गई। 27 अप्रैल को अस्पताल में बेड भी नहीं मिला और व्हीलचेयर पर ही 15 मिनट ऑक्सीजन वापस घर भेजा दिया। बिना एंबुलेंस के ही वह संक्रमित होने के बावजूद घर पहुंची। उसी रात को ऑक्सीजन लेवल डाउन हो गया। बाद में 29 अप्रैल को दोबारा अस्पताल में दाखिल करवाया गया और वेंटिलेटर पर कौन सा इंजेक्शन लगाया कोई जानकारी नहीं थी। ईसीजी मांगी तो वो भी नहीं दी। आखिर में 5 मई को डायलिसिस की बात बोलकर अंबाला छावनी यूनिट में भेज दिया। इस बीच कोई उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहा था, इसलिए वह घर आ गए थे।
किसी भी तरह का हंगामा नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीम आई थी और महिला को अपने साथ अस्पताल ले गई। - सुरेश कुमार, थाना प्रभारी सेक्टर 9
महिला की तबीयत काफी खराब थी और उन्हें डायलिसिस की भी जरूरत थी। महिला को अस्पताल जाने के लिए बोला था लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया था। उनकी दोनों बेटियों को समझाकर दोबारा अस्पताल में दाखिल करवाया है। - नीलम कुशवाह, डॉक्टर नागरिक अस्पताल अंबाला छावनी