अंबाला। छावनी के करधान स्थित श्री कुंजबिहारी गौड़ीय मठ में दूसरे दिन श्रीमद् भागवत कथा हुई। इस दौरान श्रीपाद भक्ति वेदांत सिद्धांती महाराज ने कथा में हरिनाम की अपार महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हर युग में ईश्वर प्राप्ति के मार्ग भिन्न रहे हैं।
सतयुग में कठिन तपस्या द्वारा, त्रेतायुग में विशाल यज्ञ द्वारा, द्वापरयुग में विग्रह उपासना द्वारा शामिल हैं। कलयुग में केवल नाम संकीर्तन ही वह एकमात्र नौका है जो भवसागर से पार लगा सकती है। उन्होंने बताया कि कलयुग में मनुष्य कठोर हृदय, मंदबुद्धि और आलसी होगा। इसलिए भगवान ने नाम जाप का सबसे सरल मार्ग दिया है।
इसमें किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं है। इस कलयुग के समय में जब हम हर समय चिंता और दुख से ग्रसित रहते हैं। भगवान का नाम ही हमें सहारा देने वाला है। यही वास्तविक आनंद प्रदान करता है। इसके बाद हरिनाम भजन संकीर्तन में भजनों पर भक्तजन झूमते दिखे। कथा के बाद आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। यह कथा भक्त बांधव समिति की ओर से करवाई जा रही है।