अंबाला। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल खंड पर चलने वाले पैनोरमिक कोच की खामियां दूर नहीं हो पाई हैं। कोच में लगा एसी सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। रेल कोच फैक्ट्री के विशेषज्ञ लगातार कोशिश कर रहे हैं। बावजूद इसके सुधार नहीं हो रहा है, वहीं कोच में लगी बंद खिड़कियों को लेकर भी रेलवे सेफ्टी कमिश्नर ने आपत्ति जताई थी कि अगर एसी बंद हो जाए तो कोच के अंदर बैठे यात्रियों तक हवा कैसे पहुंचेगी, इसलिए अब यह कोच कालका स्टेशन पर शोपीस बनकर रह गए हैं।
इस वर्ष भी चलना मुश्किल
कालका-शिमला रेल सेक्शन पर इन नए पैनोरमिक कोच का संचालन इस वर्ष भी होने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में इस रेल खंड पर आने वाले सैलानियों को भी मायूसी हो रही है, वहीं रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जब तक कोच की खामियों को पूरी तरह से दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक कोच के संचालन के लिए हरी झंडी नहीं दी जा सकती। ऐसे में सैलानियों को अभी इंतजार करना होगा।
28 करोड़ खर्च
कालका स्टेशन पर नए 28 पैनोरमिक कोच पहुंच चुके हैं। प्रत्येक कोच की लागत लगभग एक करोड़ के करीब है। ऐसे में रेलवे की यह 28 करोड़ की परियोजना धरातल पर नहीं उतर पा रही। सभी कोच को कालका रेलवे स्टेशन के यार्ड में रखा गया है ताकि कोई इनके साथ छेड़छाड़ न कर पाए।
धरातल पर उतरकर नहीं किया अध्ययन
पैनोरमिक कोच को शताब्दी की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसका एक सैंपल पहले विशेषज्ञों की टीम द्वारा तैयार किया गया था इसमें एक निजी कंपनी की भी मदद ली गई थी इसके बाद कोच का निर्माण रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में किया गया। कोच के निर्माण से पहले एजेंसी ने धरातल पर उतरकर कालका-शिमला रेल खंड की बारीकियों को नहीं समझा कि यहां किस प्रकार के और कौनसी सुविधाओं वाले कोच कामयाब होंगे। यही कारण है कि नए कोच में खामियां दूर होने का नाम नहीं ले रही।
कालका-शिमला रेल सेक्शन पर नए पैनोरमिक कोच का परीक्षण लगातार जारी है। आरसीएफ कपूरथला की टीम खामियां दूर करने में लगी हुई है। सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त होने के बाद ही नए कोच का संचालन किया जाएगा ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
- नवीन कुमार झा, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।