अंबाला छावनी के बारह क्रॉस रोड स्थित बिजली के पोल पर तारों को ठीक करते कर्मचारी। संवाद
अंबाला सिटी। आंधी बारिश आने पर बिजली निगम के खंभे और फीडर कुछ ही देर में ठप हो जाते हैं। कई जगह तक ट्रांसफार्मर ही दम तोड़ रहे हैं। अप्रैल और मई माह में तीन बार आंधी आ चुकी है। तीनों बार 190 से अधिक फीडर ठप रहे। 210 खंभों को भी नुकसान पहुंचा।
इसी प्रकार 24 ट्रांसफार्मरों काे भी नुकसान पहुंचा। इस कारण लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही 20 स्थान तो ऐसे थे जहां पर पेड़ लाइन पर गिरने से फीडर ठप हो गए। इनको संभालने के लिए रात्रि में ही बिजली निगम की टीम को दौड़ना पड़ा। लंबे समय से आंधी और बारिश के समय आने वाली इस समस्या का बिजली निगम अभी तक समाधान नहीं खोज पाया है। सबसे अधिक दिक्कत ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ों के लाइनों पर गिरने से होती है। हर बार वन विभाग पेड़ों की छंटाई करवाता है फिर भी कुछ पेड़ आंधी के समय में बिजली निगम के लिए मुसीबत खड़ी कर देते हैं।
तार भूमिगत करने की योजना अभी दूर
बिजली निगम ने भले ही बड़े कुछ एक शहरों में पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर भूमिगत बिजली की तारों का काम शुरू कर दिया है। मगर अंबाला जैसे बड़े शहर में अभी तक इस योजना की चर्चा भी नहीं हो रही है। जबकि यहां पर बहुत बड़ा क्षेत्र प्रभावित होता है।
ट्राॅली ट्रांसफार्मर बढ़ाकर चल रहा काम
आंधी-बारिश आने पर आपात स्थिति में भी बिजली मिल सके इसको लेकर निगम कार्य कर रहा है। निगम की बैंक में ट्रांसफार्मर की संख्या बढ़ाने के साथ मोबाइल ट्राॅली की संख्या भी बढ़ाई जा रही है ताकि आपात स्थिति में उस क्षेत्र की बिजली कुछ ही समय में चलाई जा सके। बीते दिनों आई आंधी व बारिश से कई क्षेत्रों में बिजली गुल रही। इससे लोगों को परेशानी रही।इसलिए यह फैसला लिया है। बिजली निगम के पास 23 ऐसे मोबाइल ट्रॉली हैं। जो ट्राॅली आपात स्थिति में शहर व ग्रामीण क्षेत्र में लगाई जाती है। इसमें 15 ट्राॅली और जोड़ी जाएंगी। इसी तरह ट्रांसफार्मर बैंक में ट्रांसफार्मर की संख्या बढ़ाई जा रही है।
वर्जन
वर्तमान में तारों को भूमिगत करने के संबंध में कोई रणनीति नहीं है। फिलहाल ट्राली ट्रांसफार्मर व अन्य साधनों के जरिये ही आपूर्ति की जाती है।
-वीके गोयल, अधीक्षक अभियंता, बिजली निगम।