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Ambala News: कब्रिस्तान पर मालिकाना हक का विवाद पहुंचा कोर्ट

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अंबाला छावनी ​स्थित ईसाई क​ब्रिस्तान। संवाद
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अंबाला सिटी। छावनी में स्थित संरक्षित ब्रिटिशकालीन ईसाई कब्रिस्तान के मालिकाना हक के लिए सोमवार को सिविल जज जूनियर डिविजन डॉ. सुषमा शर्मा की कोर्ट में सुनवाई हुई।
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दोनों पक्ष अमृतसर डायसन ट्रस्ट एसोसिएशन और ब्रिटिश उच्चायोग, मुख्य सचिव हरियाणा सहित अन्य पक्ष के अधिवक्ता पक्ष रखने के लिए पहुंचे। कोर्ट ने इस मामले में 21 अगस्त की तारीख लगाई है। अगली तारीख पर अमृतसर डायसन ट्रस्ट एसोसिएशन की ओर से मालिकाना हक के दस्तावेज प्रस्तुत होंगे।
कब्रिस्तान के मालिकाना हक पर आपत्ति
अमृतसर डायसन ट्रस्ट की ओर से एक वर्ष पहले बिशप शौकत भट्टी ने केस दर्ज कराया था। इसमें जमीन के मालिकाना हक के लिए आपत्ति जताई थी। इसके साथ ही मामले में मुख्य सचिव हरियाणा से लेकर ब्रिटिश उच्चायोग को पार्टी बनाया है। इस पर कुछ समय पहले से सुनवाई चलती आ रही है। यह मामला आठ अप्रैल वर्ष 2024 में शुरू हुआ था। लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी मामले की कार्यवाही चल रही है।
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नौ लोगोंं को बनाया पार्टी
केस में ब्रिटिश सरकार सहित नाै लोगों को पार्टी बनाया है। इसमें ब्रिटिश उप उच्चायोग चंडीगढ़, एसीएस हरियाणा संजीव कौशल, डीसी अंबाला, एसडीएम अंबाला और विभिन्न चर्चों के पदाधिकारी शामिल हैं। इस कब्रिस्तान की देखरेख की जिम्मेदारी द अंबाला सीमेट्री कमेटी को दी है। जिसमें छह कैथोलिक चर्चों के पास्टर शामिल हैं। 20 एकड़ में फैले इस कब्रिस्तान को संरक्षित स्मारकों में जगह दी गई है। इससे पहले इस मामले में हाई कोर्ट ने फैसला भी दिया था।
प्रथम विश्व युद्ध के अंग्रेजों की यहां हैं कब्रें
कब्रिस्तान का अधिभोग अधिकार और प्रबंधन ब्रिटिश उच्चायोग के पास है। यहां प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों की 66 कब्रें हैं। युद्ध सैनिकों की कब्रें राष्ट्रमंडल युद्ध कब्र आयोग के संरक्षण में आती हैं। खास बात है कि इसे एक सैन्य कब्रिस्तान के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि ब्रिटिश काल में भारतीय सेना में सेवा करने वाले सैनिकों की याद में कई कब्रें और स्मारक बनाए गए हैं। यहां मिली कब्रें यूरोपीय वास्तुकला में हैं। यहां 10 हजार के करीब कब्रें हैं। उनके परिजन इंग्लैंड से इन्हें देखने आते रहते हैं और मदद भी करते रहते हैं। इसके साथ ही यहां ब्रिटिश सरकार की ओर से बंदी बनाए सैनिक भी इस कब्रिस्तान में दफन हैं। वर्ष 1899 से लेकर 1902 तक हुए वार ऑफ बॉयर के दौरान अंग्रेज सैनिकों ने आसपास के क्षेत्रों में युद्ध लड़ा था। युद्ध के दौरान कई सैनिक शहीद हुए थे।
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