अंबाला सिटी। शहर विधायक निर्मल सिंह और नगर निगम आयुक्त सचिन गुप्ता के बीच चल रहे विवाद में बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। इस मामले में शहर विधायक ने चीफ सेक्रेटरी के साथ स्पीकर को भी शिकायत की है। यह मामला विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी को सुनवाई के लिए भेजा जा सकता है। मगर अभी तक सरकार बनने के बाद से नई प्रिविलेज कमेटी का गठन नहीं हुआ है। ऐसे में स्पीकर कमेटी का गठन कर मामले को कमेटी के पास भेज सकते हैं।
इस कमेटी के पास मामला गया तो नगर निगम आयुक्त की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल विधायकों के हितों व सम्मान को ध्यान में रखने के लिए विधानसभा में प्रिविलेज कमेटी होती है। इसमें अक्सर विधानसभा के अध्यक्ष स्पीकर ही होते हैं, बाकी अन्य सदस्यों को नामित किया जाता है।
सांसद ने भी कमेटी को की थी तत्कालीन डीसी की शिकायत
पिछली सरकार में विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी में तत्कालीन बराड़ा विधायक और मौजूदा सांसद वरुण चौधरी ने भी पूर्व के तत्कालीन डीसी की शिकायत की थी। जिसमें सुनवाई के लिए डीसी को उस समय के स्पीकर के सामने पेश होना पड़ता था। यह देखा गया है कि अक्सर विपक्ष के विधायकों के साथ अफसरों द्वारा किया गया ऐसा व्यवहार नया नहीं है। इस कमेटी ने कार्रवाई की तो एक मिसाल कायम हो सकती है।
विधायक रेस्ट हाउस में अधिकारियों से कर सकते हैं मुलाकात
अंबाला शहर के सेक्टर सात निवासी हेमंत कुमार बताते हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 15 जनवरी 2024 को जारी एक आदेश में स्पष्ट किया गया था कि प्रदेश के विधायक (अपने निर्वाचन क्षेत्र में) विकास परियोजनाओं से संबंधी अगर किसी प्रकार की कोई सूचना चाहते हैं, तो वह संबंधित अधिकारी से स्थानीय लोक निर्माण विश्राम गृह ( पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस) में मुलाकात कर सूचना प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि विधायक अपने क्षेत्र के स्थानीय अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं। इसी प्रकार उपायुक्त की अध्यक्षता में सब डिवीजन स्तर पर आयोजित होने वाले खुले दरबार में संबंधित विधानसभा हलकों के विधायकों को सूचित किया जाएगा न कि आमंत्रित।
वर्जन-
अभी विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी का गठन नहीं हुआ है। इसलिए नगर निगम आयुक्त के व्यवहार की शिकायत स्पीकर को की। संभवत: वह कमेटी का गठन कर उसमें भेजेंगे।
-निर्मल सिंह, विधायक, अंबाला शहर