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Ambala News: नशा मुक्ति केंद्र विभाग ने खड़े किए हाथ , गांवों में काउंसलिंग व दवा की ही सुविधा

Wed, 29 Oct 2025 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। नशे को ना कहो, जिंदगी को हां...पुलिस भले ही इस तरह के स्लोगन से जिले के गांवों में जाकर नशा मुक्त अभियान के तहत युवाओं में जोश भर रही है। इससे युवा नशा भी छोड़ रहे हैं।
अगर कोई युवा नशा छुड़वाने में मदद मांगता है तो पुलिस के पास महज काउंसिलिंग व दवा की ही सुविधा है। युवा व उनके परिवार के लोग जब नशा मुक्ति केंद्र के बारे में बात करते हैं तो विभाग की तरफ से हाथ खड़े कर लिए जाते हैं। पुलिस ने जिलाभर में जो 200 गांव मुक्त करने का दावा किया है, उसमें से अभी तक 56 युवाओं को दवा दिलवा चुकी है। दवा दिलवाने के बाद टीम उन्हें वापस गांव छोड़ देती है। यहीं कारण है कि ऐसे युवाओं की निगरानी न होने पर वह दोबारा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं।
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सालों से नशे के आदि युवा, बिना निगरानी सुधार लाना मुश्किल : पुलिस विभाग के गांवों में चल रहे अभियान के दौरान अधिकतर युवा ऐसे भी मिले हैं, जो एक दो नहीं बल्कि 10-10 साल से हेरोइन आदि नशे के आदि है। परिजनों का कहना होता है कि बिना नशा मुक्ति में डाले नशा से छुटकारा दिलवाना मुश्किल है। अगर कुछ दिन निगरानी में रखा जाए तो युवा नशा पूरी तरह से छोड़ सकते हैं।
ऐसे में एनडीपीएस सैल की जागरूकता टीम की तरफ से उन्हें या तो निजी नशा मुक्ति केंद्र की सलाह दी जाती है या फिर उन्हें अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल में चल रहे मनोचिकित्सक के पास भेज दिया जाता है।
महंगे केंद्रों में जाने से कतराते हैं ग्रामीण, सरकारी में महज डे केयर की सुविधा : अक्सर देखा गया है कि निजी नशा मुक्ति केंद्रों में सुविधाओं के नाम पर अभिभावकों से हजारों रुपये ले लिए जाते हैं। इस कारण जरूरतमंद परिवार के मरीजों को उपचार लेना कठिन होता है।
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यहीं कारण है कि युवा नशे की दलदल में घंस जाते हैं जबकि सरकारी नशा मुक्ति केंद्र की बात करें तो जिले में एक ही है। अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल में चल रहे इस नशा मुक्ति केंद्र का लाइसेंस रिन्यू न होने के कारण ओपीडी व महज डे केयर की सुविधा है। इस नशा मुक्ति केंद्र में जिलाभर से मरीज आते हैं।
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