अंबाला। बाला प्रीतम धन-धन श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी महाराज के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में श्रद्धा का सैलाब नजर आया। सैकड़ों की संख्या में संगत ने गुरु चरणों में शीश नवाया और माथा टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस मौके पर शब्द-कीर्तन, कथा और जीवन इतिहास प्रसंग की गूंज से समागम में आध्यात्मिक वातावरण बन गया। समागम में कीर्तनी तथा ढाडी जत्थों ने गुरबाणी व कथा-कीर्तन द्वारा गुरु इतिहास से संगत को जोड़ा, वहीं पंथ के महान सिख विद्वानों ने संगत को गुरु साहिब के जीवन प्रसंग सुना कर इतिहास साझा किया।
समागम के दूसरे दिन की शुरुआत हजूरी रागी ने शब्द कीर्तन से की। इसके बाद बीबी कंवलजीत कौर मसकीन शाह ने भी कीर्तन कर संगत को निहाल किया। कार्यक्रम में मंच का संचालन गुरुद्वारा साहिब के मुख्य ग्रंथी भाई बूटा सिंह ने किया। धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष हाजिरी भरते हुए प्रसिद्ध गुरबाणी कथावाचक ज्ञानी कृष्ण सिंह श्री अमृतसर वालों ने धन-धन श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी महाराज के जीवन इतिहास पर आधारित प्रसंग सुनाए।
उन्होंने कहा कि पवित्र स्थानों पर गुरु साहिबान की कृपा सदैव बनी रहती है। उन्होंने संगत को अमृतपान करने के लिए प्रेरित करते हुए गुरु के सिंह सजने का आह्वान किया। तत्पश्चात भाई सुखजिंदर सिंह नूर और भाई मेजर सिंह सुलतानपुर लोधी के ढाडी जत्थों ने अपनी-अपनी शैली में इतिहास की रचनाओं को सुना कर संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगत से रूबरू होते हुए हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जत्थेदार भूपिंदर सिंह असंध ने कहा कि संगत के सहयोग से बाला प्रीतम धन-धन श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी महाराज के प्रकाश पर्व पर आयोजित समागम पूरी तरह से सफल हुआ है।
उन्होंने दूरदराज और गांव पंजोखरा साहिब की संगत की ओर से समागम में तरह-तरह का सहयोग करने का आभार जताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा कमेटी अपने गुरु साहिबान के ऐतिहासिक पर्व मना रही है और संगत के सहयोग से सेवा संभाल काफी बेहतर ढंग से हो रहा है। उन्होंने संगत से अपील की कि वह हरियाणा कमेटी का हरसंभव सहयोग करें ताकि सिख कौम के हित में संस्था काम करती रहे।
वरिष्ठ उपप्रधान सुदर्शन सिंह सहगल ने संगत को संबोधित करते हुए हरियाणा कमेटी द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि हरियाणा कमेटी संगत के भरपूर सहयोग के बलबूते पर गुरुद्वारा साहिब में प्रबंध को ओर भी बेहतर करने में जुटी है। इसके साथ ही अनेक परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
समागम के दौरान गुरु चरणों में माथा टेकती संगत। संवाद