अंबाला। रेलवे अस्पताल में एक नेत्र चिकित्सक के सहारे 100 से अधिक मरीजों के उपचार की अधूरी व्यवस्था है और इसका खामियाजा रेल कर्मचारियों व उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। यह समस्या उनके गले की फांस बनती जा रही है, हालांकि रेलवे प्रशासन ने समस्या का उचित समाधान करने का आश्वासन दिया था, बावजूद इसके आज भी समस्या ज्यों की त्यों है।
इस समस्या से जूझ रहे सेवानिवृत कर्मचारी लगातार उच्चाधिकारियों और रेलवे प्रशासन से भी कई बार गुहार लगा चुके हैं कि नेत्र चिकित्सक की ओपीडी सप्ताह में एक दिन नहीं बल्कि तीन दिन होनी चाहिए ताकि मरीज बिना किसी परेशानी के उपचार और रेलवे कर्मचारी अपना मेडिकल बनवा सकें।
अभी ये हैं हालात
मौजूदा समय में अंबाला मंडल के सबसे बड़े और प्रमुख रेलवे अस्पताल में मात्र एक नेत्र चिकित्सक है और मरीजों की संख्या 100 के करीब है। नेत्र चिकित्सक सप्ताह में मात्र एक दिन यानी बुधवार को ही ओपीडी में बैठते हैं और मरीजों की जांच और कर्मचारियों की मेडिकल से संबंधित कार्रवाई करते हैं। इसके बाद नेत्र चिकित्सक सोमवार और मंगलवार को आप्रेशन में व्यस्त रहता है और वीरवार एवं शुक्रवार उसे जनरल ड्यूटी पर भेज दिया जाता है।
आंखों की जांच करवाने के लिए सरहिंद से सुबह 6 बजे चला था और अस्पताल में आठ बजे पहुंच गया था। लेकिन मेरे से पहले ही काफी मरीज ओपीडी के बाहर खड़े थे। अब इसमें दो से तीन घंटे का समय लग जाएगा, परेशानी होगी सो अलग।
गुलजार सिंह, सेवानिवृत रेल कर्मी, सरहिंद।
अंबाला मंडल का यह सबसे बड़ा अस्पताल है और यहां मात्र एक नेत्र चिकित्सक है। यहां रोज-रोज उपचार के लिए आना काफी मुश्किल है। सबसे बड़ी समस्या एक दिन की ओपीडी को लेकर है, अगर यह तीन दिन हो जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है।
मंगत राम, सेवानिवृत कर्मी, कालका।
कहने को यह अंबाला मंडल का सबसे बड़ा अस्पताल है, लेकिन यहां अव्यवस्थाओं का आलम है। डाक्टरों की कमी का खामियाजा रेल कर्मचारियों व उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। इस संबंध में कई बार रेलवे प्रशासन को बता चुके हैं, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
सतपाल शर्मा, सेवानिवृत कर्मी, अंबाला।
वर्जन
रेल कर्मचारियों व उनके परिजनों की इस समस्या का समाधान जरूर किया जाएगा, जिससे कि उन्हें रेलवे अस्पताल में किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।
मंदीप सिंह, डीआरएम अंबाला।