अंबाला। कुत्तों की नसबंदी की निविदा चौथी बार भी सिरे नहीं चढ़ पाई। निविदा में किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। इसलिए निविदा को पांचवीं बार लगाने से पहले विभागीय अधिकारियों ने मंथन करने का फैसला किया है।
यह कार्रवाई नगर परिषद के प्रशासक लक्षित सरीन के निर्देश पर कार्यकारी अधिकारी जरनैल सिंह ने शुरू की है। उन्होंने नियमों से संबंधित दस्तावेजों का आंकलन शुरू किया है कि आखिर क्यों ठेकेदार निविदा को भरने से कतरा रहे हैं। इस संबंध में कैंटोनमेंट बोर्ड से जुड़े ठेकेदार से भी मंत्रणा की जाएगी कि वो किस प्रकार नियमों की पालना करते हुए कुत्तों की नसबंदी का कार्य कर रहा है जबकि इस योजना को धरातल पर उतारने और पूरी कोशिश करने के बाद भी नप नाकामयाब हो रहा है।
एक साल से हो रहा इंतजार
अंबाला छावनी में लगातार कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका अंदाजा सामान्य अस्पताल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। जहां रोजाना 15 से 20 मामले अकेले कुत्ता काटने के आ रहे हैं। यह समस्या छावनी के लोगों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। गली में घूमने वाले कुत्ते कभी छोटे बच्चे को अपना शिकार बना रहे हैं तो कभी बुजुर्ग को। मील के पीछे कुछ हिस्सों में कुत्तों का इतना आतंक है कि शाम होते ही बच्चे व बुजुर्ग घर से बाहर ही नहीं निकलते। लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी इस समस्या के समाधान को लेकर कार्रवाई सिरे नहीं चढ़ पाई है।
कुत्तों की नसबंदी के नियम
भारतीय पशु कल्याण बोर्ड नियमों के तहत आवारा कुत्तों को पकड़ने, आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण एवं वापस छोड़ने तक के नियमों की अवहेलना नहीं होनी चाहिए और न ही कोई जोर-जबरदस्ती की जाए। इस कार्रवाई के दौरान रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की मदद ली जाए और इस कार्य के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे की सुविधा उपलब्ध हो। बाकायदा कार्रवाई के दौरान वीडियोग्राफी भी करवाई जाए।
वर्जन
कुत्तों की नसंबदी के लिए चौथी बार भी निविदा सिरे नहीं चढ़ पाई। इस समस्या को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। संबंधित ठेकेदारों से मंत्रणा की जाएगी और नियमों का आंकलन किया जाएगा ताकि बीच का रास्ता निकालकर इस योजना पर जल्द से जल्द कार्य शुरु करवाया जा सके।
जरनैल सिंह, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर।