राजकीय स्कूल की छात्रा से छेड़छाड़ करने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को काबू किया है। उसे अदालत में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया है। पुलिस को दी शिकायत में छात्रा की दादी ने बताया कि वह 9वीं कक्षा में पढ़ती है।
वह अपने स्कूल आती जाती थी, तो एक युवक उसके साथ छेड़छाड़ करता था। पहले तो उसने विरोध किया लेकिन वह नहीं माना। इस पर उसने सारी बात परिजनों को बताई। परिजनों ने इस बारे में पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को काबू कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया है।
दुकान से कैश व मोबाइल चोरी
कैंट माल रोड से चोरों ने एक दुकान से जहां कैश चोरी कर लिया, वहीं, मोबाइल पर भी हाथ साफ कर गए। दुकानदार ने इसकी शिकायत पुलिस को दी है। दुकानदार भीमसेन ने बताया कि वह माल रोड पर कम्यूनिकेशन की शॉप चलाता है।
शनिवार रात को वह ठीक से दुकान बंद करके गया था। जब वह सुबह आया और दुकान खोली तो पाया कि अंदर सामान अस्त व्यस्त है। जांच करने पर पता चला कि दुकान से करीब पांच हजार की नकदी व मोबाइल गायब हैं। बताया जाता है कि दुकान का ताला किसी डुप्लीकेट चाबी से खोला गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
ट्रेन की चपेट में आने से कटा युवक
शहर में शनिवार को रात करीबन पौने ग्यारह बजे रेलगाड़ी की चपेट में आने से युवक की मौत हो गई। युवक की उम्र 23 साल बताई जा रही है।
जीआरपी पुलिस ने शव को कब्जे में लिया था। जीआरपी एएसआई कुलदीप ने बताया कि शनिवार रात को अंबाला शहर और छावनी के बीच में औंजला निवासी बिट्टू (23) का शव रेलवे ट्रैक के पास मिला। पुलिस को सूचना मिली थी कि किसी व्यक्ति का शव ट्रैक के पास है। पुलिस ने बताया कि युुवक की मौत रेलगाड़ी की चपेट में आने से हुई है।
सैन्य क्षेत्र में मिला कंकाल, दहशत
सेना नगर चौक के पास सेना की बनाई जा रही नई यूनिट की दीवार के साथ बने गड्ढे से कंकाल बरामद किया है। इस कंकाल की हालत काफी खराब है। लोगों ने जब इसे देखा तो सनसनी का माहौल बन गया। तुरंत बलदेव नगर पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
जिसके बाद पुलिस इस कंकाल को एक बोरे में डालकर शहर सिविल अस्पताल ले गई। रविवार को सेना नगर में सेना यूनिट की एक दीवार के पास गड्ढे में से एक कंकाल मिला है। पुलिस ने बताया कि वहां से कुछ लोग वाहनों पर गुजर रहे थे, जिन्होंने गड्ढे में इंसान की हड्डियों जैसा ढांचा देखा। जिसे देखकर लोग घबरा गए और इसकी सूचना पुलिस का दी। उसके बाद पुलिस ने मौके पर जाकर देखा तो सड़क के किनारे गड्ढे मे कंकाल पड़ा था। हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी थी।
पुलिस ने कंकाल को कब्जे में करने के बाद शहर सिविल अस्पताल में पहुंचा दिया है। पुलिस का कहना है कि कंकाल की हालत काफी खराब हो चुकी है। कंकाल की हड्डियां भी बिखर चुकी है। घटनास्थल पर काफी बड़ी-बड़ी झाड़ियां हैं, इसलिए ये कंकाल झाड़ियों में छिपा हुआ था। मगर अब ये झाड़ियां सूखी है, जिसके बाद ये कंकाल दिखाई दिया। पुलिस के अनुसार फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि यह किसका कंकाल पुरुष का है महिला का। फिलहाल पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
दस दिन में मिला दूसरा कंकाल
अंबाला शहर में दस दिन में यह दूसरा कंकाल मिलने की घटना है। सिविल अस्पताल अंबाला शहर में इससे पहले भी 18 अक्तूबर शुक्रवार को डॉक्टर कालोनी की कोठी से कंकाल मिल चुका है। जिसमें पुलिस ने डॉ. राजेन्द्र राय की पत्नी डॉ. जंयती की शिकायत पर मामला भी दर्ज किया है। लेकिन पुलिस अभी तक यह पता करने में असफल रही है कि आखिरकार यह कंकाल किसका है और यहां कैसा पहुंचा। रविवार को मिले कंकाल केा सोमवार को पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा।
गांव खोजकीपुर में सिलेंडर ब्लास्ट का मामला
गांव खोजकीपुर में ग्लास फैक्टरी में हुए सिलेंडर ब्लास्ट के बाद प्रशासन पूरी तरह से सवालों के घेरे में है। जांच शुरू हो चुकी है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि घरों में कैसे साइंस इंडस्ट्री खुली और क्या कारण रहे कि इन खतरों के प्रति प्रशासन अनजान रहा।
गांव खोजकीपुर में स्थित जाहर ग्लास फैक्टरी में ब्लास्ट के बाद जहां दो लोगों की मौत हुई, वहीं छह लोग जख्मी हुए, जिनमें से दो को पीजीआई रेफर करना पड़ा। इसके बाद प्रशासन ने मैजिस्ट्रेट जांच शुरू की है। अब प्रशासन की नजर उन इंडस्ट्रियों पर हैं, जो घरों में खोल ली गई, जबकि इन इलाकों में कामर्शियल एक्टिविटी नहीं चलती है और यह सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है।
हालांकि प्रशासन का दावा है कि जांच को जल्द पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि सालों से यह खतरा धीरे-धीरे पनपता रहा और प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान तक नहीं गया। अंबाला कैंट का साइंस उद्योग भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि अंबाला में छोटी बड़ी करीब 1200 साइंस इकाइयां हैं, जिनमें से अधिकतर घरों में चल रही हैं। इन में कई ऐसी हैं, जिनमें ग्लास आइटमें बनाई जाती हैं और यही पर सबसे बड़ा खतरा है।
फायर ब्रिगेड की कार्यप्रणाली पर सवाल
फायर ब्रिगेड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हैं। सिर्फ घरेलू औद्योगिक इकाइयों के खतरे ही नहीं बल्कि विभाग की सुस्ती अन्य इकाइयों से भी खतरे पैदा कर रही है। किसी भी नई इकाई के लगने के वक्त फायर सेफ्टी एनओसी लेना जरूरी है और यह प्रक्रिया पूरी भी की जाती।
लेकिन नियम है कि हर साल इसे रिन्यू करना होता है, जिसमें विभाग के अधिकारी चैक करते हैं कि आखिर सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया है। लेकिन हैरानी की बात है कि घरेलू इकाइयों ने तो एनओसी तक नहीं ली, जबकि यह विभाग की जानकारी में भी है। यही नहीं जिन्होंने एनओसी ली है, उन्होंने बाद में रिन्यू तक नहीं करवाई। यह विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि एनओसी रिन्यू करवाने में उद्यमी दिलचस्पी नहीं लेते।