आलोक सिंह रघुवंशी
अंबाला कैंट। भारतीय जनता पार्टी की सबसे प्रखर नेताओं में से एक सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुनते ही अंबालावासियों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ट्विटर पर लोगों की मदद के लिए मशहूर पूर्व विदेश मंत्री स्वराज के राजनीतिक करियर की शुरुआत आपातकाल के दौरान ही हो गई थी, लेकिन राजनीति में उनकी एंट्री 1977 में तब हुई जब वह अंबाला कैंट से विधायक चुनी गईं। महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव की घोषणा के समय उनकी 25 साल की उम्र भी पूरी नहीं हुई थी। ये यादें उनकी अंगुली पकड़कर राजनीति की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता कमल किशोर ने साझा की।
कमल किशोर ने बताया कि 17 साल की उम्र में उनकी मुलाकात अंबाला कैंट के बीसी बाजार निवासी सुषमा स्वराज से हुई थी। उनका हाथ पकड़कर ही उन्होंने राजनीति की शुरुआत की। 1977 में ही वह राज्य में चौधरी देवीलाल की सरकार में श्रम मंत्री बनाई गईं, तब उनकी उम्र सिर्फ 25 साल थी। यह उस समय सबसे कम उम्र में मंत्री होने का रिकॉर्ड था। उनके नाम सबसे कम उम्र में जनता पार्टी हरियाणा की अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड भी है। उन्होंने बताया कि सुषमा स्वराज के चलते ही उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की। 1987 में उन्होंने अंबाला कैंट से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया। हालांकि 1990 में राज्यसभा चली गईं और पहली बार सांसद चुनी गईं। इसके बाद यहां से अनिल विज को मैदान में उतारा गया।
18 दिसंबर 2018 को अंतिम बार भाई का हाल जानने के लिए पहुंची थीं सुषमा
सुषमा स्वराज 18 दिसंबर 2018 को कैंट स्थित अपने पैतृक निवास पर अपने भाई का हाल जानने के लिए पहुंची थीं। दोपहर ठीक ढाई बजे मंत्री सुषमा स्वराज पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में पहुंची, यहां उनके स्वागत के लिए पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। मगर सुषमा स्वराज ने सभी को हाथ जोड़ते हुए कहा कि वह पहले अपने भाई का हाल जानने घर जाएंगी और चार बजे शाम लौटकर उनसे मिलेंगी। करीब दस मिनट बाद वह रेस्ट हाउस से चली गई थी। फिर शाम चार बजे लौटी तो रेस्ट हाउस की लॉन में ही उन्होंने सभी से बात की।
एक-एक कार्यकर्ता का नाम लेकर की मुलाकात
कमल किशोर ने बताया कि सुषमा स्वराज को कार्यकर्ताओं से विशेष लगाव था। रेस्ट हाउस में उन्होंने एक-एक कार्यकर्ता को नाम लेकर बुलाया और उनसे मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पुरानी यादों को भी ताजा किया। हालांकि इस दौरान मंत्री विज ने चाय के लिए आग्रह किया।
अंबाला में हुआ था जन्म
इनका जन्म 14 फरवरी 1952 में अविभाजित पंजाब की अंबाला छावनी में हुआ था। परिवार मूल रूप से पाकिस्तान के लाहौर का था, जो विभाजन के बाद अंबाला आ गया। सुषमा के पिता हरदेव शर्मा सनातनी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे। लिहाजा घर में अक्सर राजनैतिक चर्चाएं होती थीं। सुषमा ने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। इसी दौरान उन्हें कॉलेज की सर्वश्रेष्ठ छात्रा और अपने ओजस्वी भाषण की वजह से लगातार तीन सालों तक सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार मिला। यहां से सुषमा चंडीगढ़ पहुंचीं और पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली। लॉ कॉलेज में भी सुषमा ने अपने प्रखर और स्पष्ट विचारों से जल्द ही विद्यार्थियों से लेकर प्रोफेसरों के बीच भी धाक जमा ली।