राजीव गांधी खेल परिसर सरकपुर गांव: संवाद
- फोटो : Samvad
अंबाला। ग्रामीण आंचल के उभरते खिलाड़ियों के लिए राहत भरी खबर है। राजीव गांधी खेल परिसर साहा, सरकपुर और मोहड़ा के खेल स्टेडियमों के दिन अब जल्द ही बहुरने वाले हैं। लंबे समय से बदहाली का दंश झेल रहे इन मैदानों के जीर्णोद्धार के लिए 72 लाख रुपये का बजट जारी हुआ है। पीडब्ल्यूडी की तरफ से सोमवार को इन मैदानों में काम शुरू करने के लिए निविदा जारी कर दी गई है। जल्द ही काम शुरू होनेे बाद इन स्टेडियमों की सूरत बदली जाएगी। सबसे ज्यादा 25 लाख रुपये की लागत से मोहड़ा, 24 लाख से साहा व 22 लाख से सरकपुर स्टेडियम में काम किया जाएगा।
लंबे समय से बदहाल हो रहे मैदानों में लौटेगी रौनक
बता दें कि साहा, सरकपुर व मोहड़ा के खेल स्टेडियम पिछले काफी समय से अनदेखी का शिकार होने के कारण बदहाल पड़े थे। स्टेडियम की बिल्डिंगों में दरारें आ चुकी थीं और अभ्यास के लिए रखे उपकरण पूरी तरह जर्जर हो चुके थे। सुविधाओं के अभाव और असुरक्षित ढांचे के कारण स्थानीय युवाओं व अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों ने मैदानों में जाना ही छोड़ दिया था। वह अपने गांवों से कई-कई किलोमीटर दूर यानी कैंट प्रशिक्षण के लिए आते थे या फिर उन्हें निजी अकादमियों के मैदानों का सहारा लेना पड़ रहा है। अब बजट जारी होने के बाद न केवल भवन की मरम्मत होगी, बल्कि आधुनिक खेल उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
लाहा व बिचपड़ी में काम अंतिम चरण में
एक ओर जहां इन तीन गांवों के खेल मैदानों के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हुई है, वहीं जिले के अन्य गांवों में खेल सुविधाओं को बेहतर करने का काम तेजी से चल रहा है। विभाग के अनुसार, लाहा और बिचपड़ी के खेल मैदानों में मरम्मत और सुधार का कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। जल्द ही ये मैदान खिलाड़ियों को सौंप दिए जाएंगे। लाहा गांव के स्टेडियम का 70 प्रतिशत तो बिचपड़ी गांव के स्टेडियम में सिविल वर्क पूरा हो चुका है, जबकि बिजली से संबंधित कार्य अभी किया जाना है। बिचपड़ी में मरम्मत कार्यों पर 21 लाख 49 हजार 51 रुपये के बजट से काम हो रहा है तो लाहा स्टेडियम में 23 लाख 46 हजार 489 रुपये से काम पूरा किया जा रहा है।
72 लाख रुपये से तीनों मैदानों में काम करवाया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने निविदा लगा दी है ताकि जल्द से जल्द काम शुरू कराया जा सके।
- रामस्वरूप, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी अंबाला
राजीव गांधी खेल परिसर सरकपुर गांव: संवाद- फोटो : Samvad