अंबाला। दिल्ली कूच कर रहे किसान नेताओं ने मजबूत जत्थेबंदियां तो बना ली मगर पूरी ताकत लगाने के बावजूद सफलता नहीं मिल पा रही है। रविवार को भी कुछ ऐसा ही मंजर शंभू पर देखने को मिला। जब किसान जत्थेबंदिया पहले दिन से सबक लेकर नई तैयारियों के साथ आईं।
जत्थे में शामिल बुुजुर्ग किसान एक तरफ हुए और युवा किसानों ने मोर्चा संभालते हुए इस बार कुंडी और रस्सी की मदद से बैरिकेडिंग पर लगी जाली को उखाड़ने का प्रयास शुरू कर दिया। मगर पुलिस बार-बार आंसू गैस के गोलों से उन्हें पीछे धकेल देती। दोपहर को एक समय ऐसा आया कि किसानों ने जाली में कुंडी को फंसा लिया और दम लगाकर अपनी तरफ जाली को उखाड़ने के उद्देश्य से खींच दिया मगर वह सिर्फ जाली का एक ही हिस्सा बाहर कर सके।
इसके बाद साथ ही लोहे की रॉड को रस्से में बांधकर जाली को उखाड़ने का प्रयास किया गया मगर इसमें भी सफलता नहीं मिली। क्योंकि घग्गर के जिस गलियारे में बैरिकेडिंग बनी है वह काफी सकरा है और वहां आसानी से आंसू गैस के गोले दागने पर मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। रविवार को हवा भी शंभू मोर्चे की तरफ चल रही थी। ऐसे में पुलिस को इसका फायदा मिला और हवा में आंसू गैस मिलकर दम घोंटती दिखी। इसका असर काफी दूर तक हवा में रहा। जिसके कारण लोगों को सांस लेने और आंखों में दिक्कत का सामना करना पड़ा।