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गांवों में नहीं घुसने देंगे राज्य मंत्री और सांसद को

Sat, 05 Sep 2015 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,अंबाला
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करीब सवा दो महीने से अपनी करोड़ों रुपये की पेमेंट के लिए सड़कों पर उतरे गन्ना किसानों ने शुक्रवार को सीएम और राज्यमंत्री का पुतला फूंका। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द पेमेंट न मिली, तो राज्य मंत्री व सांसद को गांवों में घुसने नहीं देंगे। किसानों ने कहा कि इतना समय बीत जाने पर भी सरकार किसानों को राहत तो नहीं दे पाई, जबकि अभी तक नेता सिर्फ बयानबाजी में ही लगे हैं। 
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नारायणगढ़ शुगर मिल की तरफ करोड़ों रुपये की राशि के भुगतान के लिए संघर्षरत किसानों ने भारतीय किसान यूनियन के झंडे तले शुक्रवार को स्थानीय महाराजा अग्रसेन चौक पर प्रदेश के मुख्यमंत्री व सरकार में राज्य मंत्री का पुतला फूंक अपना रोष प्रकट किया।

इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 72 पर काफी समय के लिए जाम जैसी स्थिति बन गई। वहीं गुस्साए किसानों ने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे सड़कें जाम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। पुतला फूंकने से पहले किसानों ने स्थानीय अनाज मंडी से अग्रसेन चौक तक काले झंडों के साथ शव यात्रा भी निकाली।
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इस मौके पर जिलाध्यक्ष रूप सिंह बख्तुआ, भाकियू के प्रदेश संयोजक बाबू राम गुदयाना, यमुनानगर जिला प्रधान संजू गुदयाना, युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव धूम सिंह नगौली, रमेश राणा ने कहा कि स्थानीय मिल की तरफ गन्ना उत्पादक किसानों का करोड़ों रुपये अटका पड़ा है।

मिल बंद हुए लगभग पांच माह बीत चुके हैं लेकिन अभी तक किसानों की पेमेंट नहीं हुई। किसानों का कहना है कि प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जुलाई माह में 15 अगस्त तक पेमेंट करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब सरकार ने किसानों की बदहाली पर आंखें मूंद रखी हैं।

दिखाएंगे काले झंडे
किसानों ने ऐलान किया कि राज्यमंत्री के गांव में चल रहा धरना लगातार पेमेंट होने तक जारी रहेगा। किसानों का यह भी कहना है कि सांसद व मंत्री के ग्रामीण दौरों का बहिष्कार करने के साथ काले झंडे दिखाकर उनका विरोध किया जाएगा। किसानों का कहना था कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने व किसान हितैषी होने का दम भरने वाली भाजपा सरकार के शासनकाल में उद्योगपति किसानों का गला घोंटने पर उतारु हैं, लेकिन सरकार ने मिल प्रबंधन की तरफ नरम रवैया अपना रखा है जिसके कारण किसानों की पेमेंट नहीं हो रही।

इस अवसर पर मलकीत सिंह, सुरेश पाल, रामपाल, धूम सिंह नगौली, हरपाल सिंह, रामपाल, हवा सिंह, पुष्पिंद्र, राम कुमार, सुमेर चंद, साधा सिंह, बलदेव सिंह, भूषण पाल, सतीश बख्तुआ, भीम सिंह, राजबीर, फकीर चंद, नरेंद्र, जनक सिंह, अजैब सिंह, जगमाल, बृजपाल शर्मा, गुरदेव सिंह, लाभ सिंह, जयपाल, मनीष, देवी दयाल, बलबीर सैनी, मान सिंह, सुनील, कर्मवीर, राजेश सैनी, दर्शन सिंह, होशियार सिंह, मिल्खा सिंह, साहब सिंह, राम कुमार, सर्वजीत सिंह, बलबीर, हरजीत सिंह, हाकम सिंह, अजैब, सुखविंद्र, हरजिंद्र, जसबीर, देवेंद्र, चूहड़ सिंह, मामचंद, गुरदेव, सुखविंद्र, निर्मल, पोला सिंह, अलीशेर आदि मौजूद रहे।

गन्ने की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी

जिस तरह से गन्ना उत्पादकों को अपने पेमेंट के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, वहीं आगामी फसल की चिंता सता रही है। आगामी पेराई सत्र को लेकर जहां असमंजस की स्थिति है वहीं किसानों की चिंता है कि यदि मिल को गन्ना देते हैं तो फिर से पेमेंट के लिए परेशानी आ सकती है।

उल्लेखनीय है कि शुगर मिल नारायणगढ़ की ओर किसानों की करोड़ों रुपये की पेमेंट बकाया है। इसी को लेकर कुछ किसानों ने जहां हाईकोर्ट की शरण ली और उनकी बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर पेमेंट रिलीज हुई, वहीं अब फिर से कुछ किसान हाईकोर्ट का रुख कर चुके हैं। अभी भी सैकड़ों किसान अपनी पेमेंट के लिए सड़कों पर हैं।

उधर, किसानों में सुखदीप शाहपुर, बृजपाल बख्तुआ, सतीश बख्तुआ, रामपाल टपरियां, मलकीत तंदवाल, धूम सिंह नगौली, जगीर संभलवा का कहना है कि गन्ने की अगली फसल भी सिर पर खड़ी है, लेकिन मिल की तरफ से बकाया पेमेंट बकाया है। इतना ही नहीं अगली फसल की पिराई कैसे होगी इसकी कोई सूरत-ए-हाल नजर नहीं आ रही। ऐसे में दो माह बाद गन्ने की फसल को लेकर असमंजस की स्थिति है।
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