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Ambala News: कुत्तों की नसबंदी में आड़े आ रहे सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश

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अंबाला सिटी। कुत्तों की नसबंदी के टेंडर की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के आदेश आड़े आ रहे हैं। टेंडर की फाइल तैयार करने से पहले नगर निगम तोड़ निकालने में लगा है। परंतु अभी तक क्या करना है। इसकी नगर निगम के पास कोई खास योजना नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश बताते हैं कि भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थाओं को ही नसबंदी अभियान चलाने की अनुमति है। ऐसे में नगर निगम की ओर से अभियान नहीं चलाया जा रहा। इसके अलावा नसबंदी के बाद कुत्तों की देखभाल का जिम्मा भी उठाने का प्रावधान है। अकसर देखने में आता है कि नसबंदी के बाद इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता।
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वर्तमान में ये हैं हालात
दूसरी ओर डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि सोमवार को दोपहर 12 तक शहर के सिविल अस्पताल में करीब छह मामले पहुंच चुके थे। यह केवल आज की स्थिति नहीं, बल्कि रोजाना ऐसा ही होता है। यहां प्रतिदिन करीब 15 और कई बार तो एक दिन में इससे भी अधिक मामले डॉग बाइट के सामने आ जाते हैं। यह तो केवल सिटी सिविल अस्पताल की स्थिति है। इसके अलावा प्राइवेट अस्पताल में भी इतने ही डॉग बाइट के मामले पहुंच रहे हैं। इनके बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर एंटी रेबिज के टीके लगाए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से इस ओर कोई खास कार्य होता नहीं दिखाई दे रहा है। डॉग बाइट के मामलों में न केवल बच्चे बल्कि बुजुर्ग भी घायल हो रहे हैं। लाेगों की ओर से भी प्रतिदिन नगर निगम में शिकायत की जा रही है, परंतु उन्हें यही बोल कर टाल दिया जाता है कि अभी तक टेंडर नहीं हुआ।
ये आदेश निगम के लिए सिरदर्द
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से आदेश दिए हैं कि नई नियमावली के तहत उन क्षेत्रों में कुत्तों को खिलाने या आश्रय देने से भी कोई मना नहीं कर सकता। जहां ये कुत्ते निवास कर रहे हैं, वहीं कुत्तों को विस्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थाओं को ही नसबंदी अभियान चलाने की अनुमति देने के लिए कहा गया है। ऐसे में अब नगर निगम की ओर से कुत्तों की नसबंदी के लिए नए नियमों के तहत कुछ तोड़ निकालने का प्लान किया जा रहा है। इससे नियमों को ध्यान में रखते हुए इस ओर कार्य किया जा सके।
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पहले पांच हजार कुत्तों की हुई थी नसबंदी
नगर निगम की ओर से इससे पहले कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर लगाया था। उनकी ओर से पांच हजार कुत्तों की नसबंदी करने का दावा भी किया था। परंतु इसके बाद भी कुत्तों की तादाद में कहीं भी कमी दिखाई नहीं दी। इसके लिए डिप्टी मेयर राजेश मेहता ने भी कड़ा एतराज जताते हुए संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। उनका कहना था कि इतने कुत्तों की नसबंदी होने के बाद कुत्तों की संख्या में कमी आनी चाहिए थी। परंतु ऐसा अभी तक पूरे शहर में दिखाई नहीं दे रहा है। जबकि कुत्तों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है।
अब तक सामने आए मामले
1. सिंघावाला में एक कुत्ते ने बच्चे को पूरी तरह से नोच खाया था। कुत्ते ने बच्ची को इतनी बुरी तरह से काटा कि उसके टांके लगवाने पड़े थे।
2. रतनगढ़ में भी एक महिला को कुत्ते ने बुरी तरह से नोच लिया था। उस समय वह सामान लेने जा रही थी।
3. दुर्गानगर में एक बच्ची को कुत्ते ने बुरी तरह से काट लिया था, इस कारण उसकी पूरी टांग में कई जगह जख्म बन गए थे।
4. साइकिल पर स्कूल जा रहे युवक को प्रेमनगर के पास एक कुत्ते ने साइकिल पर चलते हुए ही काट लिया था। इस कारण वह चोटिल हो गया था।
क्या कहती है संस्था
वंदे मातरम् दल के प्रधान भरत ने बताया कि समय समय पर कुत्तों की नसबंदी करते रहना चाहिए। मगर यह प्रक्रिया सही तरीके से होनी चाहिए। देखा गया है कि नसबंदी सही से न होने से कुत्तों में आक्रोश आ जाता है। इनका सही से उपचार हो, तभी कोई बात बन सकती है।
वर्जन
कुत्तों के नसबंदी की फाइल पर काम किया जा रहा है। इसके तहत सबकुछ ध्यान में रखकर ही नियम व शर्तें बनाई जाएगी। इससे कि भविष्य में कुत्तों की नसबंदी कार्यक्रम के दौरान किसी की कोई शिकायत न हो।
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- दीपक सूरा, डीएमसी, नगर निगम।
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