- पंजाब, हिमाचल, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड मार्ग पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला डिपो इन दिनों स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। चालक और परिचालकों की कमी के कारण लंबे रूट हों या लोकल मार्ग हर जगह बसों के फेरे घटा दिए गए हैं। पुराने कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे हैं लेकिन नई भर्ती न होने से डिपो खाली होता जा रहा है। इसका सीधा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ता है।
स्टाफ की कमी का असर अंतरराज्यीय मार्गों पर पड़ा है। पटियाला से दिल्ली मार्ग पर पहले जहां 10 बसें दौड़ती थीं, अब महज चार बसें ही रह गई हैं। इसी तरह लुधियाना-दिल्ली मार्ग पर भी 10 के मुकाबले सिर्फ चार बसें संचालित हो रही हैं। पहाड़ी रास्तों की बात करें तो अंबाला-शिमला मार्ग पर चार बसों की जगह अब केवल एक बस जा रही है। हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी है, क्योंकि तीन में से दो बसें बंद हो चुकी हैं और केवल एक ही बस रूट पर है। चंडीगढ़ से मेरठ वाया अंबाला कैंट मार्ग पर भी दो में से एक बस बंद पड़ी है।
यह मार्ग भी प्रभावित
अंबाला कैंट से बराड़ा के लिए चलने वाली दो बसों में से एक बंद है। यमुनानगर मार्ग पर पहले 10 बसें दो-दो फेरे लगाती थीं, अब सिर्फ चार बसें एक-एक फेरा ही लगा पा रही हैं। नारायणगढ़ रूट की स्थिति और भी खराब है। अंबाला कैंट से नारायणगढ़ के लिए पहले आठ बसें चलती थीं, अब संख्या घटकर तीन रह गई है। वहीं अंबाला सिटी से नारायणगढ़ के लिए पहले 10 गाड़ियां अप-डाउन करती थीं, लेकिन अब मात्र दो बसें ही किसी तरह रूट संभाल रही हैं।
शिमला की बस के लिए हुए परेशान
उत्तरप्रदेश के कासगंज निवासी राजन सिंह ने बताया कि वह अपने घर से ट्रेन के माध्यम से छावनी रेलवे स्टेशन आए थे। उन्हें शिमला जाना था वह छावनी बस अड्डे पर एक घंटे से परेशान हो रहे हैं लेकिन बस नहीं मिली।
हरिद्वार की बस नहीं मिली
जोना देवी ने बताया कि उन्हें पारिवारिक काम से हरिद्वार जाना पड़ता है। पहले कई बसें मौजूद थीं, लेकिन अब एक-दो बसें ही चल रही हैं। भीड़ के कारण बस में चढ़ना भी मुश्किल है। महिलाओं की सुविधा का ख्याल रखते हुए बंद पड़े रूटों को बहाल करना चाहिए।
निजी बस लेनी पड़ रही
बिहार निवासी लाहौर गिरी ने बताया कि उन्हें नारायणगढ़ जाना था वह नारायणगढ़ में काम करते है उनका आना जाना लगा रहता है कई बार डिपो की बस नहीं मिलती मजबूरी में निजी बस पकड़नी पड़ती है।
डिपो में चालक ओर परिचालकों की कमी चल रही है और कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे है। इस बारे में मुख्यालय स्तर पर जानकारी दी जा चुकी है। जल्द ही डिपो में कर्मचारियों की कमी पूरी हो जाएगी
अश्वनी डोगरा, महाप्रबंधक, अंबाला डिपो।
अंबाला छावनी बस अड्डे पर खड़ी रोडवेज की बसें और बसों की इंतजार करते यात्री। संवाद
अंबाला छावनी बस अड्डे पर खड़ी रोडवेज की बसें और बसों की इंतजार करते यात्री। संवाद
अंबाला छावनी बस अड्डे पर खड़ी रोडवेज की बसें और बसों की इंतजार करते यात्री। संवाद