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Ambala News: बाल सरंक्षण इकाई में कर्मचारियों का टोटा

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अंबाला सिटी। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और विकास के कार्य करने वाले विभाग में ही कर्मचारियों की कमी के कारण निजी एनजीओ का सहारा लेना पड़ रहा है। जिला बाल सरंक्षण इकाई में डीसीपीओ सहित विभाग में काउंसलर, अधिवक्ता और डॉटा एंट्री ऑपरेटर की भी कमी है।
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बीते पांच वर्षों से विभाग में पद खाली हैं। इसके बाद भी नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं की गई। इस कारण जो योजनाएं या अभियान चलाए जाते हैं उनमें अधिक समय लगता है और पूर्ण रूप से अभियान को कवर भी नहीं किया जाता है। फील्ड कार्य करने के लिए भी दो ही कर्मचारी है।
इतने पद खाली
जिला बाल संरक्षण इकाई में 12 कर्मचारियों की आवश्यकता है। इसके मुकाबले यहां पर सिर्फ छह कर्मचारी ही तैनात हैं। यहां पर एक डीसीपीओ का एक, काउंसलर एक, अधिवक्ता, डॉटा एंट्री ऑपरेटर के तीन पद खाली हैं। इकाई का डॉटा रखने के लिए जिलास्तरीय डेटा एनालिस्ट को भी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में डॉटा एंट्री के लिए लगाया गया है। यहां पर भी काउंसलर नहीं है। एक आउट रीच कर्मचारी को भी सीडब्ल्यूसी मे डॉटा प्रबंधन के लिए लगाया है। इसके अलावा सखी केंद्र में भी स्टाफ की कमी है। वहीं इकाई के लिए पीओआईएनसी, एलपीओ के पद भी खाली पड़े हैं। इकाई में एक मात्र ओआईसी संस्थागत देखभाल में संरक्षण अधिकारी अकेले ही कार्यभार संभाल रही है।
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मिशन वात्सल्य के तहत होती है नियुक्ति
जिला बाल संरक्षण इकाई में जो कर्मचारी और अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं उन्हें वात्सल्य मिशन के तहत भर्ती किया जाता है। बीते पांच वर्षों से विभाग में नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं निकाली है। इस कारण एक ही अधिकारी पर काम का बोझ भी अधिक रहता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा का कार्य भी प्रभावित
वर्जन
हमारी ओर से प्रत्येक माह कर्मचारियों के खाली पड़े पदों की जानकारी निदेशालय को भेजी जाती है। सखी केंद्र और जिला बाल सुरक्षा इकाई में कर्मचारियों की कमी है। कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए निदेशालय स्तर पर ही कार्रवाई होती है।
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-मीक्षा रंगा, जिला कार्यक्रम अधिकारी अंबाला।
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