अंबाला। श्री सनातन धर्म सभा के 89 वें वार्षिक महोत्सव पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ में पांचवें दिन दक्ष प्रजापति और प्रसूति का व्याख्यान किया गया। बाल योगिनी 1008 महामंडलेश्वर करुणागिरी महाराज ने बताया कि तपस्या के जरिये दक्ष प्रजापति और प्रसूति के यहां देवी सती का जन्म हुआ। देवी सती ने भी तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में पाया।
वैदिक रीति-रिवाजों से शिव-सती का विवाह संपन्न हुआ। एक समय जब दक्ष ने यज्ञ में शिव को आमंत्रित नहीं किया तो इससे सती दुखी हो गई और उन्होंने यज्ञ में ही आत्मदाह कर लिया। शिवगण वीरभद्र ने अन्य शिवगणों सहित यज्ञ विध्वंस कर दिया। दक्ष का सिर भी धड़ से अलग कर दिया। क्रोधित शिव ने सती के मृत शरीर को हवनकुंड से बाहर निकाला और पूरी सृष्टि का भ्रमण करने लगे।
देवताओं की प्रार्थना पर ब्रह्मा जी के कहने पर विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र की सहायता से सती के अंगों को काटकर गिराना शुरू कर दिया। 52 टुकड़े हुए, जो 52 शक्तिपठि बने। हरियाणा कुरुक्षेत्र में भद्रकाली शक्तिपीठ है। 9 देवियां भी मां की शक्तिपीठ हैं।
मंचासीन महाराज ने कन्या भ्रूण हत्या पर प्रतिबंध की बात भी कही। इस अवसर पर विधि-विधान से भगवान शिव उमा का विवाह संपन्न हुआ। इस मौके पर प्रधान प्रो. तारा चंद गुप्ता, महासचिव सुधीर विन्दलस, कोषाध्यक्ष अशोक सिंगला, कैलाश मल्होत्रा, माया राम बंसल, लक्ष्मी नारायण खन्ना, बृज मोहन गोयल आदि ने महाराज को पुष्प हार भेंट कर अभिनंदन किया।