सरकार की ओर से जिला स्तर पर खोली जाने वाली खेल नर्सरियों का मामला अंतिम दौर में पहुंच चुका है। जिन स्कूलों ने आवेदन किया था, खेल विभाग की टीम ने इन स्कूलों का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट दी है। यह रिपोर्ट जिला खेल विभाग ने अब उच्चाधिकारियों को भेजी है, जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ही इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने जिला स्तर पर खेल नर्सरियां खोलने की योजना बनाई है, ताकि इन नर्सरियों में खेल सुविधाएं दी जाएं और यहीं पर खिलाड़ियों का स्पीड ट्रायल भी होगा। जिले के चौबीस स्कूलों ने इसके लिए आवेदन किया है, लेकिन इसमें भी कुछ जानकारियां छूट गईं। बताया जाता है कि खेल नर्सरी के लिए आवेदन तो कर दिया, लेकिन यह नर्सरी लड़कों के लिए होगी या लड़कियों के लिए अथवा दोनों के लिए यह नहीं स्पष्ट किया गया। इसके बाद यह कागजी कार्रवाई की गई, जबकि आवेदक स्कूल में इन खेलों की सुविधाओं की भी जांच की गई। जांच में देखा गया कि स्कूल में उक्त खेल को लेकर किस स्तर पर व्यवस्था है, नर्सरी यदि दी जाती है, तो बाद में सरकार को क्या व्यवस्थाएं देनी होंगी, कोच हैं या नहीं आदि बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित की गई। इसके बाद अब यह रिपोर्ट जिला खेल विभाग ने उच्चाधिकारियों को भेज दी है। सूत्र बताते हैं कि नवंबर माह तक यह खेल नर्सरियां दी जा सकती हैं।
अंबाला में मिलनी है ये यह खेल नर्सरियां
खेल विभाग द्वारा प्रदेश में जो खेल नर्सरियां खोलनी हैं, उसके लिए दस गेम्स का चयन किया गया है। इन में हाकी, फुटबाल, स्वीमिंग, बाक्सिंग, खो-खो एवं कबड्डी, आर्चरी (तीरंदाजी), रेसलिंग, हैंडबाल, एथलेटिक, वॉलीबाल शामिल हैं।
हैरानी, स्कूलों में खेल सुविधांए ही नहीं
खेल विभाग द्वारा जिला के स्कूलों से खेल नर्सरियों के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन हैरानी है कि मात्र चौबीस स्कूलों ने ही इसके लिए आवेदन किया है। अंबाला में करीब 800 सरकारी स्कूल, 34 एडिड स्कूल और करीब चार सौ निजी स्कूल हैं। जिस तरह से इस योजना में स्कूलों की बेरुखी दिखाई, उससे साफ है कि स्कूलों में खेल सुविधाओं की भारी कमी है। खेल नर्सरी में कुछ गेम्स ऐसे भी शामिल किए गए हैं, जिनके लिए ज्यादा हैवी व्यवस्थाएं नहीं चाहिएं। लेकिन फिर भी आवेदनों की कमी रही, जबकि माना जा रहा है कि स्कूलों में खेल सुविधाओं को लेकर संजीदगी नहीं है।
जिन स्कूलों ने जिस भी गेम की खेल नर्सरी के लिए आवेदन किया है, उसकी जांच की गई है। स्कूलों में जांच देखा है कि क्या उस गेम की व्यवस्था है और किस स्तर पर यह व्यवस्था है। इसकी रिपोर्ट बनाकर भेज दी गई है, जबकि जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।
- अरुणकांत, डीएसओ अंबाला