अंबाला। 10 साल पुराने निजी स्कूलों की स्थायी मान्यता रिव्यू की तकनीकी पेचीदगी खत्म हो गई है। इससे निजी स्कूल संचालकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
शनिवार को बड़ी संख्या में स्कूल संचालक कैंट में फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन और नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस के कार्यालय में एकत्र हुए प्रधान डॉ. कुलभूषण शर्मा का आभार जताया है। मगर वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सरकार कि सरकार ने अलग-अलग श्रेणियाें में अंडरटेकिंग देने की जो शर्त रखी है वह ठीक नहीं है। सभी स्कूलों ने बराबर अपनी जानकारी देकर मान्यता कराईं हैं ऐसे में उन्हें समानता की नजर से देखा जाना चाहिए। डॉ शर्मा ने कहा कि जिन स्कूलों ने जिला स्तर की कमेटी को पास करते हुए मुख्यालय में डायरेक्टर स्तर तक अपनी फाइल को पहुंचाया और वहां से पास किया गया, अब उन्हीं स्कूलों को अंडरटेकिंग देने की बात कही जा रही है। यह बात प्राइवेट स्कूल संचालकों को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही है।
प्लैज मनी वापस करे सरकार
डॉ. कुलभूषण ने मांग की स्कूलों को कोविड और बाढ़ में काफी नुकसान हुआ है। उनकी सरकार से मांग है कि वह कोई राहत पैकेज नहीं मांग रहे हैं। बस उन्होंने पहले जो प्लैज मनी जमा की है, उसे वापस कर दे। इससे प्राइवेट स्कूल अपने नुकसान की भरपाई कर सके। कोविड में दो साल बसें नहीं चली। एनसीआर क्षेत्र में बसों का समय 10 साल कर दिया।
134-ए में एक हजार करोड़ रुपये लंबित
डॉ. कुलभूषण ने कहा कि प्रदेशभर में 134-ए के तहत एक हजार करोड़ रुपये स्कूलों का सरकार पर बकाया है। सरकार यह वापस करे। इसी प्रकार चिराग योजना में स्कूलों को बच्चों अलॉट नहीं किए गए। अब बच्चे आ गए हैं तो स्कूल संचालकों को दिक्कत आ रही है। इसमें फार्म 6 की शर्त लगाई गई है, सरकार कम से कम पुराने रेट के हिसाब से ही भुगतान कर दे। प्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम से चल रही चिराग स्कूल काे धरातल पर फेल किया जा रहा है।