अप्रैल और मई स्कूल इंचार्जों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों का नया सत्र स्कूल मुखियों के लिए परेशानी भरा रहा है।
नए सत्र में दाखिलों को ऑनलाइन कराना, एमआईएस फार्म की फोटोस्टेट, स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के एससी, बीसी प्रमाणपत्रों की फोटोस्टेट आदि के साथ-साथ अब मई में स्कूलों में मासिक परीक्षाओं के आयोजन में प्रश्नपत्रों की फोटोस्टेट आदि खर्च स्कूल मुखिया जेब से कर रहे है।
जिसका विभिन्न अध्यापक संगठन विरोध कर रहे हैं। इन सब कामों में पैसे खर्च कहां से होंगे इस बारे में अभी तक भी विभाग की ओर से कोई लेटर जारी नहीं किया गया है।
इतना ही नहीं इसके बाद इन परीक्षा परिणामों को ऑनलाइन करना भी स्कूल अध्यापकों के लिए परेशानी का सबब है क्योंकि ऑन लाइन रिजल्ट अपलोड करवाने के लिए भी विभाग की ओर से स्कूलों को कोई फंड भी उपलब्ध नहीं करवाया गया। प्राइमरी स्कूलों के लिए यह सब काम काफी मुश्किल है।
क्योंकि स्कूल मुखियाओं को यही मालूम नहीं है वे उक्त खर्च किस मद से करें और क्या वे रिफंडेबल होंगे या नहीं?
उधर, शिक्षक नेता मोहन लाल परोचा और तरविंद्र सिंह कहते हैं कि अभी तो सभी स्कूल टीचर अपनी जेबों से खर्च कर रहे हैं, मगर शिक्षा विभाग के अफसर उन्हें सटीक जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि उनका ये खर्च कब रिफंड होगा। यदि ऐसा ही चलता रहा तो स्कूलों में काम करना मुश्किल हो जाएगा।
जल्द फंड आ जाएगा : बीईओ
बीईओ पवन गुप्ता का कहना है कि अभी तक तो कोई भी फंड स्कूलों में इन कामों के लिए नहीं आया है लेकिन जल्द ही फंड आ जाएगा।