डीजीपी-आईजी विवाद में अब एक एनजीओ भी आईजी पूर्ण कुमार के समर्थन में उतर आई है। एनजीओ की ओर से
अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग को पत्र लिखकर डीजीपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। मामले में संज्ञान लेते हुए आयोग ने प्रमुख सचिव (गृह) हरियाणा और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्राथमिकी दर्ज करने को कहा है। साथ ही 15 दिन में पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग दिल्ली के निदेशक कौशल कुमार की ओर से प्रमुख सचिव (गृह) हरियाणा और मुख्य सचिव को लिखे पत्र में भारतीय गणतंत्र पक्ष (एनजीओ) के प्रदेशाध्यक्ष राजू मेहरा की शिकायत का हवाला दिया गया है। शिकायत में प्रदेश के डीजीपी मनोज यादव पर एससी, एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निवेदन किया गया है। पत्र में यह कहा गया है कि राजू मेहरा की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने जांच का निर्णय लिया गया है। इसके तहत पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर शिकायत में व्यक्तिगज तौर से की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि आयोग को निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलता तो संविधान के अनुच्छेद-338 के तहत प्रदत्त सिविल न्यायालयों की शक्तियों का प्रयोग किया जाएगा और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए सम्मन जारी किया जाएगा।
दूसरी ओर अंबाला पुलिस द्वारा की गई जांच को रद्द करने के लिए आईजी वाई पूर्ण कुमार द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका पर दो जुलाई को सुनवाई होनी है। विदित हो कि आईजी वाई पूर्ण कुमार की ओर से डीजीपी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है।
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इन्हें भेजी गई है प्रति
- निदेशक, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, नई दिल्ली
- संयुक्त सचिव (सीएस) नई दिल्ली
- रेजिडेंट कमिश्नर, सरकार, हरियाणा भवन नई दिल्ली
- राजू मेहरा, राज्य अध्यक्ष, हरियाणा, भारतीय गणतंत्र पक्ष, भिवानी।
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अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग ने मामले में दोबारा से संज्ञान लिया है। इसके तहत केस दर्ज कर निर्धारित प्रारूप में जानकारी मांगी गई है। मामले में पुलिस द्वारा जानबूझकर केस दर्ज करने में देेरी की जा रही है, जो कि सुप्रीम के आदेशों की अवहेलना है। जांच को कैंसल करने के लिए हाईकोर्ट में दायर याचिका पर भी दो जुलाई को सुनवाई होनी है।
- उदय सिंह चौहान, एडवोकेट, शिकायतकर्ता पक्ष
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