अंबाला कैंट। बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य विभाग को पोलियो ड्राप्स बचाने में पसीने छूट गए। इस वैक्सीन को बचाने के काफी कम टेंपरेचर की आवश्यकता होती, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों को खास हिदायतें दी थीं। इतना ही नहीं कैंट व सिटी के सिविल अस्पताल में फिजियोथैरेपी सेवाओं सहित लैब टेस्ट, एक्सरे भी नहीं हो सके। इस कारण मरीज भी मारे-मारे फिरते रहे।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सिविल अस्पताल कैंट व सिटी भी बुरी तरह से प्रभावित हो गया। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी पोलियो वैक्सीन बचाने की रही, जिसके लिए कम से कम माइनस 20 डिग्री टेंपरेचर चाहिए। इसी को लेकर विभाग के होश उड़ गए, क्योंकि बिजली गुल रही। इसी को देखते हुए डीप फ्रीजर को जेनरेटर पर लिया गया और आइस बाक्स तैयार किए गए। इसके साथ ही कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि वे इस डीप फ्रीजर का टेंपरेचर नियमित अंतराल पर नोट करते रहें, ताकि पोलियो की वैक्सीन को सुरक्षित रखा जा सके।
उधर, दूसरी ओर सिविल अस्पतालों सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुईं। इस कारण से मरीजों को भटकना पड़ा, जबकि अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में लैब टेस्ट, एक्सरे तक नहीं हो सके। इसी कारण से फिजियोथैरेपी सेंटर (कैंट व सिटी सिविल अस्पताल) भी बुरी तरह प्रभावित रहे। फिजियोथैरेपी के लिए आने वाले मरीजों को दिक्कतें हुईं और उनको ट्रीटमेंट कुछ हद तक ही दिया जा सका।
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निजी क्लीनिकों व सेंटरों पर रही निर्भरता
बिजली कट के कारण मरीजों की निर्भरता निजी क्लीनिकों व डायग्नोस्टिक सेंटरों पर रही। मरीजों को एक्सरे व अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बाहर जाना पड़ा, जबकि लैब टेस्ट के लिए भी बाहर ही जाना पड़ा। इन सेंटरों ने जैनरेटर चलाकर मरीजों के टेस्ट आदि किए।
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‘पोलियो ड्राप्स को बचाने की प्राथमिकता था, जिसके लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए गए। इसके अलावा अन्य कुछ वैक्सीन थीं, जिनको एक खास टेंपरेचर पर रखा जाता है, जिसके लिए विभाग ने तैयारी की थी। यदि हड़ताल लंबी चलती, तो कुछ दवाओं को बचाने में दिक्कत आ सकती थी।’
- डा. विनोद गुप्ता, सिविल सर्जन अंबाला