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Ambala News: सरबजोत के पिता बोले- भरोसा था बेटा करेगा फतह

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अंबाला। अंबाला ही नहीं देशभर के लोग मंगलवार का दिन कभी भुला नहीं पाएंगे। पेरिस ओलंपिक के 10 मीटर एयर पिस्टल संयुक्त मुकाबले में मनु भाकर के साथ अंबाला के लाल सरबजोत सिंह ने भी कमाल कर दिखाया। उनके मुकाबले को देखने के लिए सुबह से ही उनकी छावनी स्थित शूटिंग अकादमी में दूसरे खिलाड़ी और कोच तैयार थे।
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जश्न मनाने के लिए सरबजोत के पिता जितेंद्र सिंह को भी अकादमी पर ही बुला लिया था। प्रोजेक्टर की व्यवस्था की गई थी, जिससे कि मुकाबला बड़े पर्दे पर देखा जा सके। मगर जैसे ही मुकाबला शुरू हुआ तो सरबजोत के पिता अकादमी के एक कक्ष में बैठ गए और दूसरे लोग मुकाबला देखने शूटिंग रेंज के पास आ गए। उनसे कोच गौरव ने कहा कि वह भी आ जाएं तो उन्होंने मना कर दिया। यहां बैठकर वे अपने बेटे के लिए नाम सिमरण करने लगे।
कुछ ही देर बार जब शूटिंग रेंज से उनके पास आवाज आई तो वह समझ गए कि सरबजोत और मनु भाकर की जोड़ी ने कमाल कर दिया फिर क्या था वह तेजी से शूटिंग रेंज की तरफ आए और अकादमी के दूसरे खिलाड़ियों के हाथों में तिरंगे को नमन किया और इसके बाद खिलाड़ियों और कोच के साथ नाचते दिखाई दिए। पिता जितेंद्र सिंह के मुंह से पहले शब्द यही निकले कि मुझे पूरा भरोसा था कि बेटा फतह करेगा। इस दौरान वह बार-बार बोलते रहे बोले सो निहाल, भारत माता की जय।
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सोच रहा था बेटे का मेडल आ जाए

सरबजोत के पेशे से किसान पिता जितेंद्र सिंह ने बताया कि जिस समय मुकाबला चल रहा था उस समय वह सोच रहे थे कि कैसे भी बेटा जीत आए। उसका ओलंपिक में मेडल आ जाए। उन्होंने बताया कि बेटे के जीतने का इतना भरोसा इसलिए भी था, क्योंकि वर्ष 2016 से जब से इसने खेलना शुरू किया तब से लेकर अब तक घर पर कभी भी खाली हाथ नहीं आया। हर बार कोई न कोई मेडल साथ लाया है। उन्होंने कहा कि अब बेटे के स्वागत की तैयारियां करेंगे। उसने पूरे देश का नाम ऊंचा किया है। शायद अंबाला का नाम ओलंपिक में पहली बार सरबजोत ने ही चमकाया है। सरबजोत सिंह एमए की पढ़ाई चंडीगढ़ डीएवी कॉलेज से कर रहे हैं तो छोटे भाई किरणजोत सिंह कनाडा में रहकर पढ़ रहे हैं।

मां ने दिखाए मेडल तो दादी बाेली मेहनती है छोरा

सरबजोत सिंह की माता हरदीप कौर भी आम दिनों की तरह घर के काम कर रहीं थी। उन्हें आसपास के लोगों से पता चला कि सरबजोत मेडल जीत गया है। वह बहुत खुश हुईं। लोगों ने मुंह मीठा कराया। इसके बाद खुशी में वह बेटे के मेडल आसपास के लोगों को दिखा रहीं थीं। वहीं दादी लाभ कौर पहले सरबजोत की शूटिंग अकादमी पहुंची। यहां उन्होंने सरबजोत को जीत की बधाई दी और कहा कि यह छोरा बहुत मेहनती था उसकी मेहनत आज रंग लाई है। इसी प्रकार सरबजोत के ताऊ रविंदर सिंह ने कहा कि पूरे देश की निगाहें सरबजोत पर टिकी हुईं थी। उसकी मेहनत का उसे फल मिला है।

आठ साल से छावनी में ले रहा ट्रेनिंग

स्थानीय स्तर पर छावनी के फीनिक्स क्लब में संचालित अभिषेक शूटिंग अकादमी में पिछले आठ साल से सरबजोत ट्रेनिंग ले रहे थे। स्थानीय कोच गौरव ने बताया कि यहीं से सरबजोत ने अपने खेल में सुधार करते हुए प्रतियोगिताओं की तैयारी की। एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय खेलों में मेडल जीते। कुछ मेडल तो अकादमी में फ्रेम किए हुए रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ओलंपिक के मुकाबले के लिए सरबजोत के साथ हम सभी ने खूब मेहनत की है, जिसकी वजह से आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। हम एयरपोर्ट से सरबजोत को गाजे बाजे के साथ लेकर आएंगे।
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