अंबाला सिटी। सरकार की वादा खिलाफी के विरोध में ग्रामीण सफाई कर्मचारी 12 अक्टूबर तक तीन दिन के लिए हड़ताल पर चले गए। मंगलवार को सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) से संबंधित ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन ब्लाॅक साहा के सफाई कर्मचारियों ने प्रधान हिमांशु के नेतृत्व में सफाई का काम बंद कर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी साहा के कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
हड़ताल के चलते गांवों में सफाई का कामकाज 12 अक्टूबर तक बंद रहेगा। ग्रामीण सफाई कर्मचारी न्यूनतम वेतन 26 हजार लागू करने, कर्मचारियों को पंचायत की बजाए बीडीपीओ के पे-रोल पर लेने, वेतन को महंगाई के साथ जोड़ने, सफाई कर्मचारियों को पक्का करने व समझौता मुताबिक वर्दी धुलाई व सफाई औजारों के लिए भत्ता देने, बेगार प्रथा पर रोक लगाने, सरकार के नियमों के अनुसार 400 की जनसंख्या पर एक कर्मचारी के हिसाब से नई पक्की भर्ती कर बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग कर रहे हैं।
सीटू नेता सतीश सेठी ने कहा कि भाजपा-जजपा की सरकार दलित विरोधी रुख अपनाए हुए है। गत दो साल में यूनियन की प्रदेश के पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली से चार बार बात हुई है। हर बार वेतन बढ़ोतरी व सालाना तीन प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ ही वर्दी धुलाई व औजार भत्ता देने का आश्वासन दिया गया। इस बारे में विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से भी जनवरी 23 में बैठक हो चुकी है, परंतु विभाग द्वारा एक ही बात कही जा रही है कि मांगों की फाइल मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए मास अप्रैल 2023 की भेजी हुई है।
यूनियन इस बारे में मंत्री व मुख्यमंत्री से कई बार लिखित में अनुरोध भी कर चुकी है। न्याय न मिलने पर मजबूरीवश कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। इसके अलावा कर्मचारियों को पीएफ व ईएसआई में आ रही स्थानीय समस्या के समाधान के लिए पंचायत अधिकारी को भी ज्ञापन भी दिया गया। सफाई कर्मचारियों ने प्रस्ताव पास कर आशा वर्कर्स की हड़ताल का भी समर्थन किया। प्रदर्शन में मुख्य रूप से हेमसा के राज्य ऑडिटर राजेंद्र कुमार व सफाई कर्मी कर्मवीर, जयभगवान, हैप्पी निर्मल, हरजिंद्र सिंह, देवी दयाल, पवन, मलकियत व अन्य उपस्थित रहे।