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चालकों ने नहीं रोकी रोडवेज बसें, भटकतीं रहीं बहनें

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अंबाला। भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए अंबाला में बहनों को इंतजार करना पड़ा। सरकार की मुफ्त बस यात्रा योजना ही बहनों के आड़े आ गई। क्योंकि अंबाला बस अड्डे पर ज्यादातर लंबे रूट की रोडवेज बसें ही नहीं रुकी। रोडवेज चालकों ने अपनी मनमर्जी करते हुए बसों को निर्धारित स्टापेज से आधा या एक किलोमीटर दूर रोका जिससे कोई भी सवारी बस में न चढ़ पाए। न केवल रक्षा बंधन पर्व पर बल्कि 14 अगस्त की रात को भी ऐसे ही हालात रहे। हालांकि अंबाला छावनी में 15 अगस्त को दोपहर के समय अड्डा इंचार्ज कुछ देर के लिए खुद बस अड्डे के बाहर खड़े हुए और बसों को रुकवाकर उसमें सवारियों को बिठाया लेकिन 14 अगस्त शाम से 15 अगस्त तक बहनों को भटक-भटक और लटक-लटक कर अपने भाई के पास पहुंचना पड़ा।
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प्राइवेट बस चालकों ने दिलाई राहत, लेकिन कई ने दिखाई चालाकी
बेशक हरियाणा रोडवेज के चालकों ने अपनी मनमर्जी दिखाते हुए सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाई लेकनि अंबाला में इस बार प्राइवेट बस चालकों ने अपनी बसें चलाकर बहनों को राहत देने का काम किया। लेकिन ज्यादातर प्राइवेट संचालकों ने या तो अपनी बसें चलाई ही नहीं या फिर जिनकी दो बसें चलती थी उन्होंने एक चला दी या इनकी ज्यादा थी उन्होंने उनमें से आधी बसोंका बंद रखा।
जाम से जूझती रही जनता, पुलिस के बंदोबस्त फेल
15 अगस्त के दिन जनता ट्विन सिटी में जाम से जूझती रही। अंबाला छावनी में बस अड्ड़े के बाहर सुबह से लेकर शाम तक जाम ही जाम रहा। यही हालात अंबाला शहर में थे। वहीं अंबाला छावनी के अंबाला से जगाधरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बस अड्डे छावनी से लेकर महेश नगर तक दोपहर दो बजे तक जाम ही जाम रहा। इस तरह पुलिस प्रशासन जाम की समस्या से निपटने में नाकाम साबित हुआ और जनता जाम से हांफती नजर आई।
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दिल्ली से आने वाले और चंडीगढ़ जाने वाली सारी बसें बाहर की ओर जा रही थी ऐसी सूचना मिली थी लेकिन बाद में मैं खुद वहां खड़ा हुआ और मैंने बसों को बस अड्डे में प्रवेश करवाया।
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रामरतन, अड्डा इंचार्ज
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